निजी कंपनियों पर अपने प्रचार का भूत इस कदर सवार है कि ट्रैफिक सिग्नल भी इससे बच नहीं पा रहे। कई चौराहे ऐसे हैं, जहां सिग्नल के ठीक सामने बोर्ड टांग दिए गए हैं। सिग्नलों के आगे सबसे ज्यादा बिल्डर प्रोजेक्टों का प्रचार ही अवरोध बनकर खड़े हैं।
शहर में चौराहों की संख्या करीब सवा सौ है। इन पर ट्रैफिक सिग्नल भी हैं। ये बात और है कि नियमित रूप से चलने वाले सिग्नल और भी कम हैं। लेकिन ज्यादातर सिग्नलों की यही स्थिति है। बिल्डर अपने प्रोजेक्टों का बैनर सिग्नल के लिए लगे पोल पर ही टांग देते हैं। वहीं कुछ उसके आगे के किसी पोल पर इन्हें टांग देते हैं, जिसके बाद सिग्नल पर खड़े वाहन चालक को बत्ती दिखाई भी नहीं देती। इनके अलावा कुछ नेता भी इस काम में पीछे नहीं हैं।
निजी कंपनियों के साथ ही बिजली के पोल भी सिग्नल के लिए अवरोधक बन रहे हैं। सेक्टर-12 चौराहे पर सिग्नल के ठीक सामने बिजली के पोल लगे हुए हैं। ये पोल प्राधिकरण ने खुद लगवाए हैं। स्ट्रीट लाइट के लिए लगे इन पोल का फायदा उठाकर कंपनियां भी प्रचार के लिए अपना बोर्ड टांग देती हैं। सेक्टर-58 थाने के पास तिराहे पर, एमपी टू मार्ग सेक्टर 31-32 चौराहे पर, एनटीपीसी चौराहा, सेक्टर-12 का चौराहा, मेट्रो हॉस्पिटल चौराहा सहित कई जगह यह दिक्कत दिख रही है।
अवैध हैं ये बोर्ड
प्राधिकरण से मिली जानकारी के मुताबिक किसी भी सड़क पर पोल लगाने की अनुमति नहीं है, न ट्रैफिक सिग्नल के सामने और न किसी चौराहे पर। ये पूरी तरह से अवैध हैं। इस तरह के बोर्ड लगाने की अनुमति प्राधिकरण ने किसी को भी नहीं दी है। सिर्फ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर बोर्ड लगते हैं। उसके लिए अनुमति दी जाती है। विज्ञापनदाता से सरकारी शुल्क भी जमा कराया जाता है।
कार्रवाई को बना है सेल
सड़कों से बोर्ड की सफाई के लिए एक सेल बना हुआ है, जिसमें छह सदस्य हैं। ये सेल ऐसे अवैध बोर्डों को उखाड़ने के लिए लगातार अभियान चलाता रहता है। पिछले दो दिनों के अभियान में भी 50 से अधिक बोर्ड उखाड़ने का दावा किया है।
बोर्ड दिखे तो दें जानकारी
इस सेल के अधिकारियों का कहना है कि अगर किसी आम जनता को भी किसी भी सिग्नल के आगे बोर्ड या कोई अन्य अवरोधक दिखे तो तत्काल प्राधिकरण के कॉल सेंटर नंबर 0120-2425025, 2425026, 2425027, 2425301 व 2425302 पर संपर्क कर जानकारी दे सकते हैं।