नोएडा का एक तबका भले ही नोएडा की मिक्स लैंड यूज पॉलिसी का विरोध कर रहा है, लेकिन अब बिल्डर इसके साथ खड़े दिख रहे हैं। बिल्डरों की संस्था क्रेडाई ने इसे संतुलित नीति करार दिया है।
गौड़ संस के प्रमुख मनोज गौड़ ने गाजियाबाद का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की पॉलिसी में हर तरह की गतिविधि को छूट दी गई, जिसका दुरुपयोग हो रहा है।
उसका नतीजा सामने है। हर जगह भीड़भाड़ की स्थिति दिखने लगी है। नोएडा ने उससे सबक लेते हुए ऐसी नीति बनाई है, जिससे कंजेशन की स्थिति नहीं बनेगी, बल्कि अभी जो चीजें पहले से चल रही हैं, वह व्यवस्थित हो जाएंगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बिल्डरों को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा।
वहीं अर्थ ग्रुप के संयुक्त प्रबंध निदेशक विकास गुप्ता ने भी प्राधिकरण की मौजूदा नीति का समर्थन किया। उनका कहना है कि हर व्यक्ति रोजमर्रा की चीजों के लिए मॉल नहीं जाता।
अगर सेक्टर में दुकानें खुल भी जाती हैं तो उससे मॉल वालों को कोई नुकसान नहीं होगा, बल्कि लोगों को सहूलियत हो जाएगी, लेकिन इस नीति की शर्तों का पालन कराने की जरूरत होगी, ताकि लोग मनमानी न कर सकें।
क्रेडाई के एनसीआर अध्यक्ष अनिल शर्मा का कहना है कि मिक्स लैंड यूज पॉलिसी विदेशों में बहुत पहले से लागू है। वहां तो ऑफिस भी घर के आसपास खुले हैं। लोगों को ज्यादा दूर नहीं जाना पड़ता।
नोएडा ने इसे अब स्वीकार किया है। यह अच्छी पहल है। इससे प्रॉपर्टी बाजार में और रौनक आएगी। वहीं, फोनरवा के अध्यक्ष एनपी सिंह इस नीति में और ढील देने की मांग कर रहे हैं, ताकि सिर्फ गेस्ट हाउस को ही नहीं, बल्कि अन्य लोगों को भी लाभ मिल सके।