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दिल्ली-एनसीआर में 10.3% मधुमेह के रोगी

Thu, 28 Nov 2013 01:51 AM IST
अमर उजाला, नोएडा
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डायबिटीज बड़ी तेजी से बड़े शहरों में रहने वालों को अपनी चपेट में लेता जा रहा है। एक सर्वे के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर में कुल जनसंख्या का 10.3 फीसदी और उत्तर प्रदेश में 9.3 फीसदी लोग डायबिटीज से पीड़ित है।
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वहीं, देश में वर्ष 2000 तक 31.7 मिलियन लोग डायबिटीज से पीड़ित थे। जबकि एक अनुमान के मुताबिक यह आंकड़ा 2030 तक 79.4 मिलियन तक पहुंच सकता है।

द नेशनल अर्बन डायबिटीज सर्वे (एनयूडीएस) ने एक नियत जनसंख्या को आधार मानते हुए टाइप-टू डायबिटीज का अध्ययन किया। इसके लिए औसतन 25 साल और उससे बडे़ 11,216 लोगों के खाली पेट व दो घंटे बाद खून की जांच की।

जांच में दिल्ली एनसीआर में 11.6 प्रतिशत और राजस्थान में 8.6 प्रतिशत लोग डायबिटीज से ग्रसित मिले। वहीं, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की ओर से महाराष्ट्र, चंडीगढ़, तमिलनाडु, झारखंड और उत्तर प्रदेश में डायबिटीज पर अध्ययन किया गया।
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अध्ययन के लिए कुल 16,607 लोगों को चुना गया, जिसमें 5,110 शहरी और 11,495 ग्रामीण को लिया गया। इसमें 13,055 लोगों के नमूनों की जांच की गई।

इसमें तमिलनाडु में 10.4 फीसदी, महाराष्ट्र में 8.4, झारखंड में 5.3, चंडीगढ़ में 13.6 और उत्तर प्रदेश में 9.3 फीसदी लोग मधुमेह से पीड़ित मिले।

अध्ययन के अनुसार भारत में अनुमानित रूप से छह करोड़ चौबीस लाख लोग डायबिटिक हैं। जबकि सात करोड़ 72 हजार लोग प्री-डायबीटिक हैं। जो कि विश्व में डायबिटीज के मामले में पहले स्थान पर है।

नोएडा से शोधकर्ता एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जीसी वैष्णव ने बताया कि देश में डायबिटीज की व्यापकता में करीब 35 वर्ष की उम्र के बाद उछाल आता है लेकिन यहां टाइप-टू डायबिटीज में सबसे अधिक मामले 25 वर्ष से कम उम्र के युवाओं में देखने को मिल रहे हैं।

उन्होंने बताया कि यदि डायबिटीज का इलाज सही समय पर शुरू नहीं किया जाता तो इसका असर दिल, रक्त नलिकाओं, आंखें, गुर्दे और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है।

क्या है डायबिटीज टाइप-टू
डॉ. वैष्णव ने बताया कि आमतौर पर 30 साल की उम्र के बाद यह धीरे-धीरे बढ़ता है। इसमें इंसुलिन कम मात्रा में बनता है या पैंक्रियाज सही से काम नहीं कर रहा होता है।
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डायबिटीज के 90 फीसदी मरीज इसी श्रेणी में आते हैं। योग, संतुलित भोजन और दवाइयों से इसे नियंत्रित रखा जा सकता है।
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