नई दिल्ली। नरेंद्र भाई मोदी की रैली के लिए पहले दमखम दिखाओ फिर टिकट पाओ। कुछ इसी मूड में अब भाजपा दिख रही है। 20 सितंबर के पहले प्रत्याशियों की सूची जारी करने के अपने बयान से अब भाजपा पलट गई है। पार्टी का कहना है कि, 29 सितंबर के बाद ही उम्मीदवारों की सूची जारी होगी।
सूची जारी नहीं होने के पीछे महत्वपूर्ण तथ्य है कि, मोदी की रैली को सफल बनाना। पार्टी यह मानकर चल रही है कि अगर सूची जारी कर दी गई तो कई नेता नाराज हो जाएंगे और रैली को सफल बनाने में मददगार साबित नहीं होंगे। सूची जारी नहीं हुई तो सभी दावेदार रैली में अपना दमखम पेश करेंगे। इस तरह मोदी की रैली को महारैली बनाई जा सकती है।
उल्लेखनीय यह भी है कि शुक्रवार से पांच अक्तूबर तक पितृ पक्ष है। लिहाजा नवरात्र में ही उम्मीदवारों की सूची जारी होना अब तय है। दूसरी तरफ सूची जारी करने में दिल्ली प्रदेश चुनाव समिति के सदस्यों के बीच खींचतान भी आड़े आ रही है। पिछले तीन दिनों से चुनाव समिति की बैठक लगातार टल रही है। इतना ही नहीं दो बैठक तो चुनाव प्रभारी नितिन गडकरी की गैर मौजूदगी में ही हो गईं।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विजय गोयल का कहना है कि, उम्मीदवारों की सूची 29 सितंबर के बाद होगी। उनका तर्क है कि ऐतिहासिक रैली को सफल बनाने के लिए कार्यकर्ता दिन-रात काम कर रहे हैं।
सीएम प्रोजेक्ट करने के मूड में नहीं पार्टी
प्रदेश भाजपा विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री का चेहरा प्रोजेक्ट करने के मूड में नहीं है। पार्टी का कहना है कि दिल्ली के नेता विजय गोयल, डॉ. हर्षवर्धन और प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा के संयुक्त नेतृत्व में चुनावी मैदान में उतरेंगे।
एक रैली के दौरान जब दिल्ली के चुनाव प्रभारी नितिन गडकरी से पूछा गया कि चुनाव से पहले भाजपा मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करेगी या नहीं तो उनका जवाब था, बिल्कुल नहीं।
हालांकि मुख्यमंत्री का चेहरा पेश करने के सवाल पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह का कहना था अभी जल्दी क्या है। यह अधिकार संसदीय बोर्ड का है। इससे स्पष्ट है कि पार्टी फिलहाल बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के चुनाव मैदान में उतरेगी।