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बड़े ठेकेदार भूमिगत, सिपहसलार मैदान में

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नोएडा। अवैध खनन को लेकर जहां पूरे प्रदेश में हाहाकार मचा हुआ है, वहीं युमना नदी के किनारे बसे गांवों में इसका कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है। इतना जरूर हुआ है कि पहले यमुना नदी में डंपर व जेसीबी मशीन या पोपलैंड मशीन खड़ी होकर अवैध खनन कर बालू भरने में लगी रहती थी, अब उनकी जगह ट्रैक्टर ट्रॉली ने ले ली है। यह ट्रैक्टर ट्रॉली खनन माफियाओं के बजाए स्थानीय ग्रामीणों की है। जिनके लिए यह रोजी-रोटी बन गई है।
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यमुना नदी से सटे ग्रामीणों के मुताबिक बड़े पैमाने पर अवैध खनन करने वाले युवक अब भूमिगत हो गए हैं। इनके ऊपर बड़े नेताओं का हाथ था। अब उनके सिपहसलार अवैध खनन कर यमुना नदी से निकाली गई बालू को अपने अहाते में स्टॉक कर रखा है और रात के अंधेरे में डंपर बुला कर उसे भेज दे रहे हैं। ये गांव के ही युवक हैं। इन्हें बड़े खनन माफियाओं ने ग्रामीणों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए अपनी खनन लॉबी में शामिल किया था। अवैध खनन से जुड़े युवकों के मुताबिक उन्होंने ट्रैक्टर ट्रॉली लोन पर खरीदी थी। जिनके भरोसे भविष्य के सपने बुने थे वह ठेकेदार अब उन्हें छोड़ कर भाग निकले हैं। ऐसे में लोन की किस्त चुकाने के लिए उन्हें मजबूरन खनन करना पड़ा रहा है। उनकी नजर में यह खनन अवैध नहीं है। उनका अपना तर्क है। उनके खेतों में बालू जमा है तो उसे निकाल कर बेच रहे हैं, तो क्या गलत है। सरकारी राजस्व या रॉयल्टी से उनका कोई वास्ता नहीं है।
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