नोएडा। वाहनों से होने वाले वायु व ध्वनि प्रदूषण से शहर की फिजा में सांस लेना मुश्किल हो रहा है। ऑटो, बसों व अन्य वाहनों से निकलने वाली दमघोंटू हवा से निजात दिलाने में बैटरी चलित रिक्शा उम्मीद की किरण बन सकते हैं। हालांकि ये शहर की सड़कों पर इक्का-दुक्का दिखने भी लगे हैं। लेकिन ऑटो चालकों की दबंगई के चलते ये सफल नहीं हो पा रहे हैं। वाहनों से होने वाले प्रदूषण से शहर पूरी तरह मुक्त हो जाए, यह तो फिलहाल संभव नहीं है। लेकिन तेजी से बढ़ते प्रदूषण पर अंकुश जरूर लगाया जा सकता है। यदि प्रशासन ईको फ्रेंडली बैटरी चालित रिक्शों को प्रोत्साहन दे। वर्तमान में शहर में दस बैटरी चालित रिक्शे दौड़ रहे हैं। जो सुरक्षित और अन्य मानकों पर भी खरे उतरते हैं। इनसे बिल्कुल प्रदूषण नहीं होता है। लेकिन इनके विकास के लिए प्रशासन की ओर से किसी तरह का प्रोत्साहन और मदद नहीं मिलने से इनका दायरा नहीं बढ़ पा रहा है। वहीं ऑटो चालकों के मनमाने रवैये से भी ये सफल नहीं हो पा रहे हैं। कुछ समय पहले तक बैटरी रिक्शा नोएडा सिटी सेंटर से चला करते थे, लेकिन ऑटो चालकों ने धमका कर इन्हें यहां से हटा दिया। इसके चलते ये अब सेक्टर-63 के सीमित क्षेत्र में चलते हैं। बैटरी रिक्शा चालक जवाहर चौधरी कहते हैं कि इन्हें मुख्य सड़कों पर ही चलाने की कोशिश थी। लेकिन ऑटो चालक स्टैंड पर खड़ा ही नहीं होने देते थे। ऐसा करने पर मारपीट पर उतारू हो जाते थे।
बैंक लोन नहीं मिलने से होती है दिक्कत
अस्सी हजार कीमत के बैटरी रिक्शा को खरीदने के लिए बैंक व सरकार से किसी प्रकार के लोन एवं अन्य प्रकार की सहायता नहीं दी जाती है। जिस कारण आर्थिक रूप से कमजोर रिक्शा चालक को इसे एक मुश्त रकम देकर खरीदना थोड़ा कठिन होता है। इनकी खरीद पर यदि लोन मिलने लगे तो निश्चित ही इनकी संख्या में वृद्धि होगी।
काफी कम खर्चीला वाहन है
बैटरी रिक्शा, अन्य वाहनों की अपेक्षा काफी कम खर्चीला है। यह तीस रुपये की बिजली में करीब 70 किलोमीटर चलता है। साथ ही अन्य रखरखाव पर भी न्यूनतम खर्चा होता है। रिक्शा चालक दयानंद कहता है कि करीब छह घंटे में इसकी बैटरी चार्ज हो जाती है। चार्ज होने में खर्च होने वाली बिजली की कीमत करीब 25 से 30 रुपये होती है। उन्होंने बताया कि इसको अन्य वाहनों की तरह सर्विस कराने की भी जरूरत नहीं है।