नोएडा। डीएनडी को लेकर हुए विवाद का स्थायी समाधान निकालने के लिए प्राधिकरण स्वतंत्र चार्टर्ड एकाउंटेंट और लॉ अफसर की मदद लेगा। इनकी सहायता से समझौते के हर पहलू को खंगालने का काम किया जाएगा, जिससे बीच का कोई रास्ता निकाला जा सके। वहीं, दूसरी तरफ डीएनडी की बकाया राशि की भी जांच होगी।
भारतीय किसान यूनियन की चेतावनी के बाद टोल ब्रिज कंपनी ने डीएनडी की बढ़ी हुई दरों को वापस ले लिया, लेकिन उसके डीएनडी को टोल फ्री करने की मांग उठाने पर मामला अभी तक शांत नहीं हुआ है। हर बार के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए कोई स्थायी उपाय खोजने की बात कही जा रही है। प्राधिकरण के अधिकारिक सूत्रों की माने तो जल्द ही स्वतंत्र सीए और लॉ अफसर नियुक्त किए जाएंगे। एक तरफ प्राधिकरण सीए से सारे बही खातों की जांच करवाएगा। वहीं, दूसरी तरफ लॉ अफसर कानूनी पहलुओं को खंगालने का काम करेगा। इसके बाद इनकी राय को आधार बनाकर शासन स्तर पर वार्ता होगी और फैसला लागू किया जाएगा।
सूत्रों ने बताया कि डीएनडी के निर्माण से पहले जो समझौता हुआ है उसमें कई जगह खामियां हैं। इसे कानूनी रूप मिल चुका है। ऐसे में बिना ठोस कदम उठाए कार्रवाई नहीं हो सकती। इस बिंदु पर काम करते हुए स्वतंत्र अधिकारियों की नियुक्ति होगी। गौरतलब है कि नोएडा प्राधिकरण ने दक्षिणी दिल्ली आने जाने के लिए प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीपी) आधार पर ब्रिज तैयार करवाया। इसमें टोल ब्रिज कंपनी को तीस साल तक टोल वसूली का अधिकार दिया गया। इसमें घाटा होने की दशा में हर साल टोल बढ़ाने की अनुमति भी दी गई। इसके तहत वृद्धि होती है, लेकिन विरोध प्रदर्शन के कारण तीन बार बढ़ी हुई दरों को वापस लेना पड़ा है।