उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा मंत्री रामगोविंद चौधरी के सुझावों पर विभागीय अधिकारियों ने यदि अमल किया तो बीटीसी में दोबारा आवेदन के लिए शुल्क नहीं जमा करना पड़ेगा।
बुधवार को इस संबंध में चौधरी ने अधिकारियों की बैठक बुलाई थी, जिसमें राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) से प्रस्ताव मांगा है।
उत्तर प्रदेश में परिषदीय स्कूलों में शिक्षक बनने की योग्यता स्नातक और बीटीसी है। एससीईआरटी इस बार छात्रों की सुविधा के लिए दो महत्वपूर्ण व्यवस्था करने का प्रस्ताव शासन को भेजा था।
पहला आवेदन शुल्क सामान्य और पिछड़ा वर्ग का 400 से 300 और अनुसूचित जाति, जनजाति का 200 से 150 करने का और एक आवेदन गलत होने पर दूसरा आवेदन करने की छूट का प्रस्ताव था।
एससीईआरटी का दोबारा आवेदन करने का प्रस्ताव इसलिए तैयार किया है कि पिछले वर्ष काफी छात्रों के आवेदन गलत हो गए थे, जिसके चलते उन्हें प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होने से वंचित होना पड़ा था।
बेसिक शिक्षा मंत्री ने बुधवार को इस संबंध में विभागीय अधिकारियों और सहयोगी राज्य मंत्रियों की बैठक बुलाई थी। इसमें चर्चा के दौरान उन्होंने इस प्रस्ताव का स्वागत तो किया लेकिन यह सुझाव दे दिया कि यदि दोबारा आवेदन के लिए शुल्क न लिया जाए तो छात्रों का बड़ी राहत मिलेगी।
अधिकारियों ने बेसिक शिक्षा मंत्री के सामने तो कुछ नहीं कहा लेकिन सूत्रों की मानें तो वह इसके पक्ष में नहीं हैं।
उनका मानना है कि दोबारा शुल्क न लेने की छूट से फर्जी फार्म जमा होने की संभावना बढ़ जाएगी। दुश्मनी निकालने के लिए किसी के नाम से कोई भी फार्म भर देगा। इसलिए पूरा मामला प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा पर छोड़ दिया गया है।