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Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर - नीलू बनकर किशोरी को ब्लैकमेल करने का आरोपी जुबेर दोषमुक्त

Tue, 26 Sep 2023 01:21 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
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चंडीगढ़ के लिए खास
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- वीडियो बनाकर किशोरी के यौन उत्पीड़न प्रकरण में पॉक्सो कोर्ट का आया फैसला
- अदालत ने माना अभियोजन पक्ष पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करने में रहा असफल

अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। वीडियो बनाकर किशोरी को ब्लैकमेल कर रुपये ऐठने के प्रयास के मामले में अदालत ने सुबूतों के अभाव में चंडीगढ़ के दोनों आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया। किशोरी की सोशल मीडिया पर नाम छिपाकर आरोपी ने फोन पर बातचीत शुरू हुई थी। अदालत ने माना प्रकरण में अभियोजन पक्ष पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहा है।
तितावी थाना क्षेत्र के गांव निवासी किशोरी से वर्ष 2021 में चंडीगढ़ के युवक ने नीलू नाम से सोशल साइट्स पर बातचीत शुरू की। आरोप है कि इसी बीच आरोपी ने किशोरी का वीडियो बना लिया। उसके बाद वीडियो वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करने का खेल शुरू हो गया। उसी दौरान किशोरी को आरोपी ने गहने और नगदी लेकर चंडीगढ़ आने की धमकी देनी शुरू कर दी। परेशान होकर पीड़िता ने पूरी घटना भाई को बता दी। वादी ने आरोपी के पास फोन किया। उसे वीडियो डिलीट करने के लिए बोला तो गुस्से में उसने कई लोगों को वीडियो भेज दिया। परिजन फोटो लेकर चंडीगढ़ गए, लेकिन वहां मालूम हुआ कि सोशल मीडिया पर बातचीत करने वाला नीलू नहीं बल्कि जुबेर है और वह घर से कहीं बाहर गया है।
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चंडीगढ़ में आरोपी जुबेर के चाचा आशिक और दानिश मिले। उन्होंने वीडियो डिलीट कराने की एवज में 10 लाख रुपये मांग की। लाचार होकर पीड़िता का भाई वहां से लौट आया। कुछ दिन बाद आरोपी ने फिर परेशान करना शुरू कर दिया। वादी ने थाने में तीन मार्च वर्ष 2022 को तीनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, रंगदारी, पॉक्सो एवं आईटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा पंजीकृत करा दिया। पुलिस ने विवेचना के बाद जुबेर अहमद और आशिक निवासी मोहल्ला गोविंदपुरा थाना मनीमाजरा चंडीगढ़ के खिलाफ आरोप प्रेषित किया। अभियोजन पक्ष ने वादी एवं पीड़िता सहित पांच साक्षी को अदालत में परीक्षित कराया।
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अपर सत्र न्यायालय (विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट) के पीठासीन अधिकारी बाबूराम ने दोनों पक्षों की दलील सुनी। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के विरुद्ध लगाए आरोपों को युक्तियुक्त संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है। सबूतों के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए दोनों आरोपियों को बरी कर दिया है।
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