चरथावल में राजगुरु, सुखदेव और भगत सिंह के बलिदान दिवस पर आर्य युवकों ने देश भक्ति गीतों के साथ नगर के प्रमुख मार्गों पर परिक्रमा निकाली। वक्ताओं ने शहीदों के बलिदान पर प्रकाश डाला। क्षेत्र में नशा मुक्ति के लिए जनचेतना अभियान की शुरुआत की गई।
बृहस्पतिवार को आर्य समाज मंदिर में बलिदान दिवस पर यज्ञ के बाद गोष्ठी का आयोजन हुआ। आकाश आर्य और अंकित आर्य ने कहा कि राष्ट्र के प्रति समर्पण, निष्ठा और देशभक्ति का जज्बा लेकर तीनों नौजवानों ने 23 मार्च को हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूम लिया था। उनके बलिदान को भूलाया नहीं जा सकता। देश के लिए तीनों शहीदों की कुर्बानी के वक्त लाहौर जेल में बंद हर कैदी की आंखें नम थीं।
फांसी के मचान पर जाने के पहले उनकी आखिरी ख्वाहिश पूछी गई तो तीनों का जवाब था कि हम गले मिलना चाहते हैं। फांसी के फंदे के सामने तीनों ऐसे गले मिले मानो नए सफर की शुरुआत होने वाली है। आर्य युवकों ने गोष्ठी के बाद पूरे नगर में डीजे पर देशभक्ति के गीतों के साथ वीर शहीदों को नमन करते हुए परिक्रमा निकाली। आचार्य योगेश, आकाश आर्य, अंकित आर्य, तोषण आर्य, अजय आर्य, आशीष आर्य, दर्पण आर्य, उज्ज्वल आर्य, जुगनू त्यागी, अमन आर्य, विपिन आर्य और अंशुल मौजूद रहे। पीएसी के अलावा भारी पुलिस बल परिक्रमा के साथ मौजूद रहा।