मोरना। श्रावणी पर्व पर श्री शुकदेव संस्कृत माध्यमिक विद्यालय के 54 विद्यार्थियों ने पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज से उपनयन वेदारंभ संस्कार की दीक्षा ली। उन्होंने कहा कि वैदिक सनातन संस्कृति के अंतर्गत सोलह संस्कारों में यज्ञोपवीत संस्कार मानव जीवन का सबसे श्रेष्ठ, आवश्यक एवं महत्वपूर्ण संस्कार है।
पीठाधीश्वर ने कहा कि परमात्मा से प्रदत्त वैदिक ज्ञान को संसार में सर्वत्र फैलाने के लिए मंत्र द्रष्टा ऋषियों की परंपराओं को निर्वहन करने के लिए यज्ञोपवीत धारण किया जाता है। यज्ञोपवीत वेद पठन पाठन के अधिकार का प्रतीक है, जो सत्यनिष्ठ जीवन जीने, सन्मार्ग पर चलने तथा सत्कर्म की प्रेरणा देकर जीवन के लक्ष्य का बोध कराता है। आचार्य जीसी उप्रेती, आचार्य विकास, आचार्य सुमन कृष्ण, आचार्य अरुण, ठाकुर प्रसाद, आचार्य युवराज, आचार्य अतुल, राजेंद्र, मनोज मौजूद रहे। उधर, श्री शुकदेव आश्रम यज्ञशाला में श्रावणी उपाक्रम के अंतर्गत प्रधानाचार्य गिरीश चन्द के साथ विद्यार्थियों ने यज्ञ में वेद मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दी। सिद्ध अक्षय वट की परिक्रमा कर श्री शुकदेव मंदिर में पूजन किया।