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अर्जुन जैसी तपस्या कर दिव्या काकरान ने छू ली बुलंदियां, बन गईं देश का गौरव

Wed, 19 Aug 2020 12:56 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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बेटी को अर्जुन अवार्ड मिलने की घोषणा पर पुरबालियान गांव में खुशी मनाते दिव्या के परिजन। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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खेल का सर्वोच्च पुरस्कार अर्जुन अवार्ड मिलने की घोषणा से मुजफ्फरनगर के पुरबालियान की बेटी दिव्या काकरान देश का गौरव बन गई है। वह अपने बेहतरीन प्रदर्शन के बलबूते इस अवार्ड की हकदार बनी है। उसने बुलंदियों को छू लिया है। दिव्या की इस कामयाबी से उसके परिवार में खुशियां छाई है। लोग परिवार को बधाई दे रहे हैं।
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मंसूरपुर के गांव पुरबालियान निवासी दिव्या काकरान ने अपने बाबा राजेंद्र पहलवान से मिली कुश्ती की विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी है। बाबा के बाद पिता सूरज पहलवान ने अखाडे़ में कुश्ती लड़ी। लोगों के विरोध के बावजूद सूरज ने बेटी दिव्या को अखाड़े में उतार कर कुश्ती के दांवपेंच सीखाए। दिव्या ने लड़कों से भी कुश्ती लड़ी। अपनी लगन, मेहनत और परिश्रम से वह आज इस मुकाम पर पहुंची।

मंगलवार रात को अर्जुन अवार्ड की घोषणा होने पर दिव्या के परिवार में खुशी छा गई। पुरबालियान गांव में मौजूद बाबा राजेंद्र, राजवीर सिंह, दादी प्रेमवती, पिता सूरज, मां संयोगिता, बडे़ बेटे देव काकरान समेत परिवार के सभी सदस्यों ने अर्जुन अवार्ड मिलने की घोषणा पर खुशी मनाई। लोगों ने उनको दिव्या की कामयाबी पर बधाई दी।
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उधर, दिव्या छोटे भाई दीपक के साथ दिल्ली के गोकुलपुर आवास पर है। दिव्या ने कहा कि एक खिलाड़ी के लिए इससे बड़ा पुरस्कार और क्या हो सकता है। परिवार की बदौलत वह इस मुकाम पर पहुंची हूं। दिव्या ने बताया कि अब उसका लक्ष्य टोक्यो ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है।

अब तक 53 गोल्ड के साथ जीत चुकी 72 पदक
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई प्रतियोगिताओं में दिव्या अब तक 72 पदक जीत चुकी है। इनमें 53 गोल्ड, 7 रजत और 12 कांस्य पदक शामिल है। उसने चीन में सीनियर एशियन चैंपियनशिप में देश के लिए कांस्य पदक, मंगोलिया में यू-23 सीनियर एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल, आस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में आयोजित 21 वें राष्ट्र मंडल खेलों में ब्रांज मेडल, इंडोनेशिया के जकार्ता में हुए 18 वें एशियन गेम्स में भी कांस्य पदक जीता था। वह एशियाई जूनियर चैंपियनशिप में रजत पदक विजेता बनी थी। कामनवेल्थ में भी उसने गोल्ड पदक जीता था।

पहले भी मिल हैं जनपद के खिलाड़ियों को अर्जुन अवार्ड
दिव्या काकरान से पहले भी जिले के खिलाड़ियों को अर्जुन अवार्ड मिल चुके हैं। भारतीय कुश्ती टीम के कोच बरवाला के पहलवान जगमेंदर को सबसे पहले अर्जुन अवार्ड मिला था। उन्हें द्रोणाचार्य अवार्ड भी मिल चुका है। मुंडभर निवासी भारतीय कबड्डी टीम के कप्तान रहे संजीव बालियान, बढेड़ी निवासी पहवान अनुज चौधरी, जानसठ निवासी शूटर मुराद अली को भी अर्जुन अवार्ड मिल चुका है।
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