उधर, दिव्या छोटे भाई दीपक के साथ दिल्ली के गोकुलपुर आवास पर है। दिव्या ने कहा कि एक खिलाड़ी के लिए इससे बड़ा पुरस्कार और क्या हो सकता है। परिवार की बदौलत वह इस मुकाम पर पहुंची हूं। दिव्या ने बताया कि अब उसका लक्ष्य टोक्यो ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है।
अब तक 53 गोल्ड के साथ जीत चुकी 72 पदक
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई प्रतियोगिताओं में दिव्या अब तक 72 पदक जीत चुकी है। इनमें 53 गोल्ड, 7 रजत और 12 कांस्य पदक शामिल है। उसने चीन में सीनियर एशियन चैंपियनशिप में देश के लिए कांस्य पदक, मंगोलिया में यू-23 सीनियर एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल, आस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में आयोजित 21 वें राष्ट्र मंडल खेलों में ब्रांज मेडल, इंडोनेशिया के जकार्ता में हुए 18 वें एशियन गेम्स में भी कांस्य पदक जीता था। वह एशियाई जूनियर चैंपियनशिप में रजत पदक विजेता बनी थी। कामनवेल्थ में भी उसने गोल्ड पदक जीता था।
पहले भी मिल हैं जनपद के खिलाड़ियों को अर्जुन अवार्ड
दिव्या काकरान से पहले भी जिले के खिलाड़ियों को अर्जुन अवार्ड मिल चुके हैं। भारतीय कुश्ती टीम के कोच बरवाला के पहलवान जगमेंदर को सबसे पहले अर्जुन अवार्ड मिला था। उन्हें द्रोणाचार्य अवार्ड भी मिल चुका है। मुंडभर निवासी भारतीय कबड्डी टीम के कप्तान रहे संजीव बालियान, बढेड़ी निवासी पहवान अनुज चौधरी, जानसठ निवासी शूटर मुराद अली को भी अर्जुन अवार्ड मिल चुका है।