चुपचाप न बैठें, अधिकारों के लिए उठाएं आवाज
मुजफ्फरनगर। विश्व उपभोक्ता दिवस पर उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग होने की जरूरत है। नियम कायदों की जानकारी नहीं होने के अभाव में अक्सर उपभोक्ता अपने हितों को लेकर संघर्ष करने की बजाय चुपचाप घर बैठ जाना ही ज्यादा ही उचित समझते हैं। ऐसे में अब समय आ गया है कि अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए आपको आगे आना होगा। साथ ही किसी वस्तु की खरीदारी करते समय सतर्क जरूर रहे।
उपभोक्ता दिवस पर केवल कागजी खानापूर्ति कर कर्तव्यों का इतिश्री कर ली जाती है। नगर निवासी जोगेंद्र गोयल ने एक कंपनी से इस शर्त के साथ सामान खरीदा कि उपयुक्त नहीं होने पर उसे निर्धारित अवधि में वापस कर लिया जाएगा। उपभोक्ता ने इसे वापस करना चाहा तो कंपनी प्रतिनिधि ने वापस नहीं किया। अजय कुमार ने शॉपिंग सेंटर से दाल का पैकिंग खरीदा। दाल खराब निकलने पर उसे विक्रेता ने वापस नहीं लिया।
हलवाई की दुकान पर मिठाई के साथ डिब्बा तौलने से लेकर खरीदा गया सामान सही नहीं निकलने और सर्विस ठीक नहीं मिलने की समस्या से हर किसी व्यक्ति का सामना होता है। विक्रेता तवज्जो नहीं देते और उपभोक्ता को घर बैठना पड़ता है। ऐसा इसलिए होता है कि आम उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होते। विधिक बांट-माप विज्ञान के वरिष्ठ निरीक्षक हरीश प्रजापति बताते हैं कि उपभोक्ताओं के अधिकारों के संरक्षण के लिए उपभोक्ता संरक्षण विधेयक 1986 बना है। जिला उपभोक्ता प्रतितोष फोरम न्यायालय में वाद दायर कर सकते हैं। कम मात्रा में सामान मिलने, पैकिंग पर दर्शाए अनुसार सामग्री नहीं निकलने पर विधिक बाट-माप विज्ञान विभाग में शिकायत कर सकते हैं।
कोई भी वस्तु खरीदें तो रसीद जरूर लें
मुजफ्फरनगर। उपभोक्ता मामलों के अधिवक्ता अनुभव अग्रवाल बताते हैं कि इस तरह के मामलों में न्याय पाने का उपभोक्ता प्रतितोष फोरम बहुत अच्छा माध्यम है। कुछ दिन पूर्व ही एक वाद में ई-लर्निंग कंपनी को उपभोक्ता को जुर्माने के साथ रकम वापस करनी पड़ी। इसी तरह जोड़ों के दर्द का तेल बेचने वाली कंपनी के खिलाफ भी जुर्माने के आदेश हुए। वह बताते हैं कि सामान्य तौर पर लोग कोई वस्तु या सेवा लेते समय उसकी रसीद नहीं लेते। जब भी कोई उत्पाद खरीदें तो उसकी रसीद जरूर लें। रसीद ही सबूत होती है। इसी के माध्यम से न्यायालय में पैरवी की जा सकती है।
एक साल में 291 मामले पकड़े
विधिक बांट माप विज्ञान विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक हरीश प्रजापति बताते हैं कि बीते एक वर्ष में 291 मामले पकड़े गए हैं। इनमें घटतौली के साथ ही ऐसे भी प्रकरण हैं, जो पैकिंग पर दर्शाई गई जानकारी के अनुरूप नहीं थे। इनमें से 253 मामलों में एक करोड़ का शमन शुल्क वसूला गया। 25 मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं।