उच्च प्राथमिक विद्यालय में ट्रैक्टर ट्रॉली से उपले उतारते छात्र।
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शासन की जंग लगी व्यवस्था के कारण प्राइमरी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पटरी से उतर गई है। बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों का हाल कब सुधरेगा यह कोई कह नहीं सकता। सब पढ़े-सब बढ़े का सरकारी अभियान कैसे पूरा हो पाएगा, जब स्कूल आए बच्चों से ट्रैक्टर-ट्रॉली से उपले उतरवाए जाएंगे। सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं से पढ़ाई के अलावा दूसरे काम लिए जाने के मामलों की कई शिकायतें हो चुकी हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
मुजफ्फरनगर के भोपा के आदर्श उच्च प्राथमिक विद्यालय में बुधवार को एक ट्रैक्टर-ट्रॉली से बच्चों से उपले उतरवाने का मामला प्रकाश में आया है। शिक्षा ग्रहण करने आए बच्चों और मैदान में खेलते बच्चों को मिड डे-मील के ईंधन में इस्तेमाल होने वाले उपले उतारने में लगा दिया। मामले की भनक ग्रामीणों को लगी। इस पर ग्रामीणों ने रोष जताया। चौंकाने वाली बात यह है कि इसी विद्यालय परिसर में बीईओ का दफ्तर भी है। प्रधानाध्यापक ने मानवीय पहलू को दरकिनार कर बच्चों को उपले से भरा ट्रैक्टर-ट्रॉली खाली कराने में लगा दिया। ग्रामीणों की शिकायत है कि ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यापक की सहमति से परिषदीय स्कूलों के कमरों में उपले भरवाए जा रहे हैं। सर्दी में पठन-पाठन को आए विद्यार्थियों को कहां बैठाया जाएगा।
मामले की जानकारी खंड शिक्षा अधिकारी जितेंद्र कुमार को दी गई। उनका कहना है कि निकाय चुनाव में ड्यूटी की वजह से फिलहाल वह मुख्यालय पर हैं। ग्राम प्रधान और स्कूल इंचार्ज ने बृहस्पतिवार को ज्यादा भोजन बनाए जाने को लेकर उपलों के प्रयोग का अनुरोध किया था। हालांकि गैस सिलेंडर से ही मिड-डे मील बनाने का प्रावधान है। मामले की जांच कराई जाएगी। उधर, पुरकाजी विकासखंड के गांव मलकपुरा में प्राइमरी स्कूल में पढ़ने आए बच्चे मैदान की सफाई करते पाए गए। कक्षाओं में बस्ते रखकर कई छात्राओं को झाड़ू हाथ में थमाकर सफाई कार्य में लगा दिया गया। एबीएसए योगेश शर्मा का कहना है कि मामले की जांच कराई जाएगी, दोषी पाए जाने पर कार्रवाई करेंगे।