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Muzaffarnagar News: दौर बदला...फिर भी दिलों में अब भी बसा है रेडियो

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बुढ़ाना मोड़। रेडियो ने एक समय में हर घर की आवाज़ बनकर समाज को जोड़ा था। सीमित संसाधनों के बावजूद, यह सूचना, मनोरंजन और सामाजिक संदेशों का सबसे सुलभ माध्यम था, जिसने लोगों के जीवन में गहरी छाप छोड़ी।
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रेडियो के माध्यम से देश-दुनिया की खबरें, मौसम की जानकारी, खेती-किसानी के टिप्स और मनोरंजन सीधे लोगों तक पहुंचते थे। गांव-देहातों में सुबह की शुरुआत रेडियो की आवाज़ से होती थी।
चौपालों पर सामूहिक रूप से कार्यक्रम सुनना लोगों को आपस में जोड़ता था।
गांव बरवाला निवासी सेवानिवृत कर्मचारी 85 वर्षीय बाबूराम शर्मा आज भी रेडियो के श्रोता हैं। नियमित रेडियो उनके पास ही रहती है। समाचार, लोक रागनियां, और पुराने गीत एवं अन्य परिचर्चा वह बड़े शौक से आज भी रेडियो पर सुनते हैं।
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पीनना निवासी 73 वर्षीय शेर सिंह रेडियो के द्वारा अपना मनोरंजन करते हैं। विविध भारती से आने वाले कार्यक्रम, समाचार एवं रागनियां तथा अन्य कार्यक्रम वह बदस्तूर सुनते हैं वह कहते हैं इसमें कोई ज्यादा खर्च भी नहीं होता है तथा मनोरंजन हो जाता है।



गांव किनौनी निवासी रामपाल सिंह अमीन रेडियो को संचार का साधन मानते हैं समय-समय पर ग्रामीण जीवन पर कार्यक्रम एवं किसान खेती मौसम संबंधित सूचना मनोरंजन एवं समाचार बुलेटिन के द्वारा लोगों को जागरूक करती है।
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