जिला बीते तीन दिनों से पूरी तरह ठंड के आगोश में है। बुधवार को सूरज कुछ ही देर के लिए निकला। ठंड पर सूरज की तपिश भी बेअसर दिखाई दी। ठंडी हवाओं से लोग दिन में भी कंपकंपाते नजर आए। शहर के मुख्य चौराहों और गलियों में लोग दिन में भी अलाव पर हाथ तापते नजर आए। इसके अलावा दिन में दोपहर तक कोहरे की चादर ढकी रही।
बुधवार को भी जिला पूरी तरह शीतलहर की चपेट में रहा। ठिठुरन और गलन भरी सर्दी से जीवन ठहरता नजर आया। दोपहर तक शहर में कोहरा छाया हुआ था और जनजीवन पूरी तरह रुका रहा। ठंड इतनी अधिक रही कि शहर में गली मोहल्लों तक में लोगों को अलाव जलाकर हाथ सेंकते हुए देखा गया।
दिन में दुकानदार अपनी दुकानों पर बैठे कंपकंपाते नजर आए। दुकानों के बाहर लकड़ियां जलाकर ठंड दूर की। कड़कड़ाती ठंड से बाजार में भी ज्यादा चहल-पहल नजर नहीं आई। ठंड और शीतलहर को देखते हुए जिला प्रशासन ने चार जनवरी तक आठवीं तक के सभी स्कूलों की छुट्टी कर रखी है। इस कारण बच्चे अपने घरों में ही दुबके रहे। बुजुर्ग भी गरम कपड़ों के सहारे घरों में ही चाय की चुस्कियां लेते रहे।
पहाड़ों पर लगातार हो रही बर्फबारी का प्रभाव जिले में सीधा दिखाई दे रहा है। सर्दी बढ़ी है और आने वाले दिनों में भी सर्दी के तेवर ऐसे ही तीखे दिखाई दे रहे हैं। ठंड और कोहरे के कारण जनपद से गुजरने वाली अधिकतम ट्रेन देरी से चल रही हैं।
ठंड में यात्रियों की संख्या कम हो जाने के कारण रोडवेज को भी चक्कर घटाने पड़े हैं। सुबह और शाम में यात्रियों की संख्या काफी कम है। उधर, जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह का कहना है कि गेहूं की फसल के लिए ठंड लाभकारी है। जनवरी माह में तापमान 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहे तो गेहूं के लिए अधिक लाभकारी रहता है।
सर्दी में सूने हुए बाजार, नहीं आ रहे ग्राहक
खतौली। नया वर्ष शुुरू होते ही सर्दी ने अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया है। कड़ाके की ठंड को देखते हुए प्रशासन को स्कूली बच्चों की छुट्टी करनी पड़ी। पिछले दो दिनों से लगातार कोहरे के साथ पाल पड़ रहा है। दोनों दिन सूर्यदेव के दर्शन तक नहीं हुए। हालांकि यह ठंड गेहूं की फसल के लिए बेहद लाभकारी है।
ठंड बढ़ने से किसान खेत में छिलाई तक नहीं पा रहे हैं। जिस कारण गन्ना क्रय केंद्रों पर पिछले दो दिनों से कम गन्ना आ रहा है। ठंड की वजह से लोग अपने घरों में दुबके रहते हैं। बाजारों में भी ग्राहक कम ही दिखाई पड़ रहे हैं। तहसील प्रशासन व नगर पालिका प्रशासन की ओर से चौराहों पर दिन में अलाव जलाने के लिए लकड़ियां डलवाई जा रही है। दिन छिपने से पूर्व अलाव को जलवा दिया जाता है।