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जीत ने भुला दिया दंगे का दर्द

Tue, 03 Nov 2015 01:14 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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मुजफ्फरनगर। कवाल कांड में एक साल जेल की सलाखों के पीछे रहे पूर्व प्रधान विक्रम सैनी को जिला पंचायत चुनाव में सफलता मिली है।
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दंगे के मामलों की पैरवी कर रहे भाजयुमो नेता नितिन मलिक की पत्नी अंजलि और राजीव सैनी की जीत पर मतदाताओं ने मुहर लगा दी है।

दो साल पहले 27 अगस्त को कवाल में हुए तिहरे हत्याकांड में पुलिस ने विक्रम सैनी को जेल भेज दिया था। बाद में उन पर रासुका भी तामील कर दी गई थी।

उनकी रिहाई का मामला सुर्खियां बना था। विक्रम की पत्नी और बेटियों ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से कवाल में अपने पिता को रिहा करने की मांग रखी थी।

भाजपा सांसद हुकुम सिंह और केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान ने विक्रम की गिरफ्तारी पर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी।

एक साल बाद जेल से छूटे विक्रम सैनी ने पंचायत सदस्य के लिए चुनाव लड़ा। वार्ड 35 से विक्रम ने अपने प्रतिद्वंद्वी  सज्जाद प्रधान को हराया है।

बुढ़ाना में भाजयुमो नेता नितिन मलिक ने पहली बार सियासी दंगल में दांव भरा। उन्होंने पत्नी अंजलि को पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तरसपाल मलिक के सामने उतारा था। चुनाव परिणाम में अप्रत्याशित नतीजा देते हुए अंजलि ने रालोद प्रत्याशी तरसपाल को 1066 मतों से शिकस्त दी।

दंगे के मुकदमों में फंसे फुगाना और बुढ़ाना थाना क्षेत्र के कई गांवों के ग्रामीणों की मदद में नितिन की सक्रियता रही है। पलड़ी के पूर्व प्रधान राजीव सैनी भाजपा के समर्थन से चुनाव लड़े। प्रतिद्वंद्वी इदरीश को पराजित किया।
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शाकिर जीत नहीं पाया चुनाव
नंगला मंदौड़ की सात सितंबर की महापंचायत से लौटती ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर पुरबालियान में हमले के आरोपी शाकिर अली चुनाव हार गए हैं।

पूर्व जिला पंचायत सदस्य की गिरफ्तारी को लेकर भाजपाइयों ने आईजी के सामने विरोध जताया था। वार्ड 28 से शाकिर को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। पूर्व सांसद कादिर राना का समर्थन भी शाकिर के काम नहीं आया। मंसूरपुर थाने में शाकिर के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं।

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