मुजफ्फरनगर। साइबर अपराधी ने एपीके फाइल भेजकर ककरौली निवासी मोबाइल विक्रेता के खाते से 3.78 लाख रुपये निकालकर आनलाइन खरीदारी कर ली। साइबर थाना टीम ने आरोपी गुरप्रीत उर्फ गगन को पंजाब से गिरफ्तार कर लिया। उससे साइबर ठगी में प्रयुक्त दो मोबाइल, पांच सिम, एक आधार कार्ड व एक आधार कार्ड की छाया प्रति बरामद हुई है।
एसपी क्राइम इंदु सिद्धार्थ ने पुलिस लाइन सभागार में बताया कि अगस्त माह में ककराैली निवासी नवाब के मोबाइल पर चालान एप के माध्यम से एपीके फाइल भेजी गई थी। उसे डाउनलोड करते ही उसके दो खातों से 3 लाख 78 हजार 500 रुपये कट गए थे। साइबर थाना पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि बिहार में ऑनलाइन सोने के सिक्के व एक मोबाइल की खरीदारी की गई। पुलिस ने मोबाइल की डिलीवरी रुकवा दी लेकिन सिक्के की डिलीवरी पंजाब निवासी हरमन नाम के व्यक्ति को हो चुकी थी। जिस पते पर डिलीवरी पहुंचानी थी वह फर्जी निकला क्योंकि साइबर ठग ने पता बदल दिया था।
डिलीवरी देने वाले कर्मचारी से बात करने पर डिलीवरी लेने वाले व्यक्ति का मोबाइल नंबर व आधार लिया गया। आधार कार्ड फर्जी निकला। मोबाइल की एक आईडी इंदौर व दूसरी आईडी उड़ीसा की आई। आरोपी ने ठगी करने में प्रयुक्त सिम भी दूसरे के नाम पर लिया था। मोबाइल नंबर के आधार पर ही पुलिस टीम ने असली ठग का पता लगाया। जो पंजाब के जिरकपुर में टेकटाउन सोसाइटी का रहने वाला गुरप्रीत उर्फ गगन था। वह मूल रूप से पंजाब के जिला फाजिल्का के कस्बे अबोहर का रहने वाला था।
पिछले लगभग दस साल से जिरकपुर में रहता था। वह 2018 से साइबर ठगी के धंधे मे सक्रिय है। उसके खिलाफ गुरुग्राम, फाजिल्का में चार मुकदमे दर्ज है। आरोपी ने फर्जी आधार कार्ड मोबाइल से बनाया था। उसके खाते से ककरौली निवासी दुकानदार के पैसे की डिटेल मिली है। दुकानदार के खाते से बिहार के धनबाद निवासी पंकज के खाते में ट्रांजेक्शन हुई थी। इसके बाद ऑनलाइन खरीदारी की गई। पंकज की भी तलाश की जा रही है। इस गिरोह के बारे में और भी जानकारी जुटाई जा रही है। आरोपी को जिरकपुर से पकड़ा गया। आरोपी ने बीए की शिक्षा प्राप्त की है। आरोपी ने इस अपराध में अपनी असली पहचान कही भी प्रयोग नही की। सभी जगह फर्जी कागजों का प्रयोग किया गया। प्रेसवार्ता में साइबर थाना प्रभारी सुल्तान सिंह, दरोगा धर्मराज यादव, गौरव चौहान भी मौजूद रहे।
एपीके फाइल न खोलें
एसपी क्राइम इंदु सिद्धार्थ ने बताया कि एपीके फाइल का अधिकांश तौर पर प्रयोग ठगी के लिए किया जाता है। इस फाइल को मोबाइल पर आने के बाद न खोलें अन्यथा ठगी को शिकार हो सकते है।