पड़ रही दोहरी मार, गेहूं बुवाई की चिंता में घिरे किसान
मुजफ्फरनगर। इस बार मौसम और परिस्थिति गेहूं की फसल के बुवाई के अनुकूल नहीं है। जिले में लगभग 80 हजार हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की बुवाई होती है, अभी तक 50 प्रतिशत बुवाई ही हो पाई है। जो खेत खाली थे, उनमें बेमौसम बारिश और उसके बाद धूप नहीं निकलने से बुवाई पिछड़ गई, जिन खेतों में गन्ना था, वह खाली नहीं होने के कारण किसान गेहूं की बुवाई नहीं कर पाए। अब विलंब से बुवाई की स्थिति में हर सप्ताह प्रति हेक्टेयर एक क्विंटल पैदावार कम होती जाएगी। दोहरी मार पड़ने से किसान चिंता में घिरे हैं।
जिले में धान काटने के बाद केवल दस प्रतिशत किसान ही गेहूं की खेती करते हैं। 90 प्रतिशत किसान गन्ना काटकर गेहूं बोते हैं। एक तो चीनी मिलों के देर से चलने की वजह से खेत खाली नहीं हो पाए, दूसरे मौसम खराब होने से कोल्हु भी बंद हो गए। जो खेत खाली थे, उनमें भी मौसम प्रतिकूल होने के कारण बुवाई नहीं हो पाई। गेहूं की बुवाई के लिए 15 नवंबर से 15 दिसंबर के बीच का समय उपयुक्त है। हर साल 15 दिसंबर तक केवल 40 प्रतिशत किसान गन्ना काटकर गेहूं की बुवाई कर लेते थे, इस बार 30 प्रतिशत किसान ही गन्ना काटकर गेहूं की बुवाई कर पाए हैं। दिसंबर के पहले पखवाड़े में हुई बारिश के चलते किसानों के खेत तैयार नहीं हो पाए, इस कारण बुवाई लेट हो गई। गन्ने की पर्ची अपेक्षा के अनुरूप नहीं आने और मौसम खराब होने के चलते कोल्हू बंद होने से दूसरा विकल्प भी बंद हो गया। इस कारण किसान इस बार गेहूं की बुवाई में अधिक पिछड़ गया है। इस समय जिले में 50 प्रतिशत किसान ऐसे हैं जो गेहूं की बुवाई नहीं कर पाए है। इन किसानों को जनवरी में ही गेहूं की बुवाई करनी होगी।
15 दिसंबर के बाद बुवाई से घटता है उत्पादन
मुजफ्फरनगर। स्वामी कल्याण देव कृषि विज्ञान केंद्र बघरा के निदेशक डॉ पीके सिंह का कहना है कि 15 दिसंबर के बाद गेहूं की जो बुवाई होती है, उसमें उत्पादन कम होता है। जितनी देरी से बुवाई होगी हर सप्ताह एक हेक्टेयर में एक क्विंटल का उत्पादन घटता चला जाता है। फसल की उम्र जितनी कम होगी उत्पादन उतना ही कम होगा।
गन्ना काटकर बोना मजबूरी
मुजफ्फरनगर। उप निदेशक कृषि जसवीर सिंह तेवतिया का कहना है कि हमारे जिले में गेहूं का 80 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य है। यहां 90 प्रतिशत किसान गन्ना काटकर गेहूं बोता है। ऐसे में पर्ची आदि की समस्या रहती है। यही कारण है कि यहां गेहूं की बुवाई जनवरी के अंत तक चली जाती है।
खेत खाली हो तो करें बुवाई
मुजफ्फरनगर। गेहूं की बुवाई को लेकर चिंतित किसानों का कहना है कि खेत खाली हो तो बुवाई करें। ढिंढावली के किसान सेवाराम और सुबोध का कहना है कि इस बार उन्हें समय से मिल की पर्ची नहीं मिली इस कारण गन्ने की बुवाई में देरी हुई। लुहारी खुर्द के नरेंद्र का कहना है कि कोल्हुओं के बंद होने से छोटे किसान के सामने अधिक परेशानी है। खेत खाली होने पर ही गेहूं बोया जा सके गा।
पर्ची का वितरण सही चल रहा
मुजफ्फरनगर। डीसीओ डॉ आरडी द्विवेदी का कहना है कि इस बार चीनी मिलो का कैलेंडर तेजी के साथ दौड़ रहा है। किसानों को लगातार पर्ची जारी हो रही है। चीनी मिलों में क्षमता के हिसाब से पेराई हो रही है। चीनी मिलों की पेराई क्षमता छह लाख 17 हजार क्विंटल प्रतिदिन करने की है। इस समय चीनी मिल पांच लाख 12 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई चल रही है। समस्त गन्ना एक साथ नहीं पेरा जा सकता है। पर्ची वितरण में समस्या नहीं है।