इलाहाबाद माघ मेले में पेपर मिल्स और डिस्टलरी को राहत मिल गई है। गंगा स्नान के दिन इंडस्ट्रियों को बंद नहीं किया जाएगा। इंडस्ट्रियां अपना उत्पादन कार्य कर सकती हैं, लेकिन दूषित जल को प्रवाहित करने पर रोक लगाई गई है। गंदा पानी फैक्ट्री से बाहर नहीं आएगा। इसकी निगरानी के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम कार्य करेगी। वहीं, शुक्रताल गंगा के पानी के नमूनों की रिपोर्ट बनाई जा रही है।
प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद के संगम तट पर चलने वाले माघ मेले को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मेला 45 दिन चलेगा। जबकि मेले में पहला गंगा स्नान दो जनवरी मंगलवार को पड़ रहा है। इस दिन साधु-संतों के स्नान होने के बाद आम श्रद्धालु स्नान प्रारंभ करेंगे। स्नान के जनवरी में ही चार पर्व मुख्य है।
इसको लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गंगा स्नान के दिन पेपर मिल्स और डिस्टलरी को बंद रखने के निर्देश दिए हैं, जिसके चलते स्थानीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों ने मामले को लेकर कसरत प्रारंभ कर दी। इंडस्ट्रियों की जांच-पड़ताल कर प्रदूषण की स्थिति का आंकलन किया गया है। भोपा रोड, जानसठ रोड, मेरठ रोड के साथ अनेक औद्योगिक इकाईयों में जल प्रदूषण की गंभीरता से जांच हुई।
गंगा स्नान के दिन इंडस्ट्रियों पर तालाबंदी होने की खबर से उद्यमी परेशान थे। सोमवार को इंडस्ट्रियों की बेचैनी दूर हो गई है। पेपर मिल्स और डिस्टलरी को राहत मिल गई है। अब गंगा स्नान के दिन यह इंडस्ट्रियां बंद नहीं होगी। इन्हें केवल दूषित जल को प्रवाहित करने से मना किया गया है।
इंडस्ट्री उत्पादन कार्य कर सकती है, मगर दूषित जल को बाहर नहीं छोड़ सकती है। राहत मिलने से औद्योगिक इकाईयों को लाभ मिलेगा। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी विवेक राय ने बताया कि इंडस्ट्रियों को राहत मिल गई है। गंगा स्नान के दिन औद्योगिक इकाईयां दूषित जल को बाहर नहीं छोड़ सकती है। इसके लिए क्षेत्रीय स्तर पर अधिकारियों को अलर्ट किया गया है, जो निगरानी रखेंगे।