विधानसभा चुनाव में मोदी मैजिक के आगे सब बेबस हो गए। कई प्रत्याशी ऐसे रहे हैं, जो अपने गांव में ही चुनाव हार गए। पुरकाजी से कांग्रेस प्रत्याशी दीपक कुमार अपने गांव पचेंडा में हार गए। रालोद प्रत्याशी छोटी बेगम भी अपने कस्बे में वोट नहीं पा सकी।
विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबले में रहे प्रत्याशी अपने ही गांव में हारे हैं। पुरकाजी विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी दीपक कुमार अपने गांव पचेंडा में चुनाव हार गए। मुस्तफाबाद और पचेंडा में दीपक कुमार को 1170 वोट मिले हैं, जबकि बीजेपी के प्रमोद ऊंटवाल को इस गांव में 2589 मत मिले।
चरथावल से सपा प्रत्याशी मुकेश चौधरी को मुकुंदपुर के तीन बूथों पर 421 वोट मिले हैं, जबकि भाजपा के विजय कश्यप को 800 वोट मिले हैं। बसपा के अनिल कुमार भी 1218 मत लेकर दीपक कुमार से ऊपर आ गए। रालोद प्रत्याशी छोटी बेगम पुरकाजी कस्बे की हैं, कस्बे के लोगों ने उन्हें पूरी तरह नकार दिया। 16 बूथों पर उन्हें मात्र 142 वोट ही मिल पाए। कांग्रेस यहां पहले और भाजपा दूसरे स्थान पर रही।
सुजडू में गच्चा खा गया राना परिवार
मुजफ्फरनगर। सुजडू गांव के सहारे राजनीति करने वाले राना परिवार को अपने ही गांव में चुनौती का सामना करना पड़ा। बसपा प्रत्याशी नूरसलीम राना को अपने गांव में 5590 वोट मिले। सपा के मुकेश चौधरी को 5469 वोट मिले। जबकि पूर्व के चुनावों में राना को यहां से थोक में वोट मिलते थे। बसपा के पूर्व सांसद कादिर राना भी भाई के लिए यहां कोई चमत्कार नहीं कर सके।
राजपाल सैनी के गांव में बसपा को 70 वोट
मुजफ्फरनगर। जिले के बसपा नेता और पूर्व सांसद राजपाल सैनी के गांव में भी बसपा की हालत पतली रही है। बसपा प्रत्याशी सईदा बेगम को गांव के दोनों बूथों पर मात्र 70 वोट मिले हैं, जबकि भाजपा के उमेश मलिक को गांव से 950 वोट मिले हैं।