नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ जमीयत का देवबंद में विरोध-प्रदर्शन
देवबंद। नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में जमीयत उलमा हिंद (महमूद मदनी गुट) के देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन की कड़ी में शुक्रवार को देवबंद इकाई ने जोरदार प्रदर्शन किया। विधेयक को वापस न लेने पर बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी दी गई।
ईदगाह रोड स्थित महमूद हॉल में जुमे की नमाज के बाद जमीयत उलमा हिंद (महमूद मदनी गुट) ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने विधेयक को देश के संविधान के खिलाफ बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन में शामिल वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं पूर्व विधायक इमरान मसूद ने कहा कि देश में अघोषित इमरजेंसी जैसे हालात बन गए हैं। नागरिकता संशोधन बिल देश का काला कानून है, इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। इमरान मसूद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर देश में नफरत की सियासत करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए इस तरह के विधेयक ला रही है। जिससे जनता का ध्यान आम मुद्दों से भटक जाए। मसूद ने कहा कि देवबंदी उलमा ने अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई लड़ी और अब भाजपा की नफरत की सियासत के खिलाफ भी यहीं से लड़ाई लड़ी जाएगी। जमीयत के प्रदेश सचिव जहीन अहमद, पूर्व विधायक माविया अली, साद सिद्दीकी और पूर्व पालिकाध्यक्ष इनाम कुरैशी आदि ने भी नागरिकता संशोधन बिल को काला बिल बताते हुए इस फौरन वापस लेने की मांग की। इस संबंध में एसडीएम के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर प्रदर्शन समाप्त किया गया। संचालन मौलवी महमूद दरियाबादी ने किया। विरोध प्रदर्शन में उमैर उस्मानी, हाजी जैद, जमाल नासिर उस्मानी, मोहम्मद साद, सलीम उस्मानी समेत बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग मौजूद रहे।
250 नहीं, हजारों की संख्या में देंगे गिरफ्तारी : इमरान
दो दिन पूर्व हाईवे पर जाम लगाकर हंगामा करने वाले 250 छात्राओं पर मुकदमा दर्ज किया गया था। इमरान मसूद ने कहा कि यदि प्रशासन ने मुकदमे को वापस नहीं लिया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। 250 छात्र नहीं, बल्कि हजारों लोग गिरफ्तारी देंगे।
मोहतमिम की सख्ती के बावजूद प्रदर्शन में शामिल हुए मदरसा छात्र
शुक्रवार को महमूद हॉल में जमीयत के धरना प्रदर्शन में मदरसा छात्रों ने शामिल होकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बृहस्पतिवार को दारूल उलूम के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी ने छात्रों से विरोध व प्रदर्शन में तलबा के शामिल होने पर रोक लगा दी थी। प्रदर्शन में भाग लेने पर सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी थी। इसके बाद भी मदरसा छात्र जमीयत के विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए।
चौकन्ना रहा पुलिस-प्रशासन
जमीयत के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ही नहीं, खुफिया विभाग और जनपद के आला अधिकारी सतर्क दिखाई पड़े। कमिश्नर संजय कुमार, डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल, एसपी (देहात) विद्यासागर मिश्र पीएसी व भारी पुलिस बल के साथ सुबह से धरना समाप्त होने तक देवबंद में ही डटे रहे। दारूल उलूम समेत आसपास के क्षेत्र ही नहीं, सहारनपुर-मुजफ्फरनगर हाईवे पर भी पुलिस अलर्ट रही। धरना-प्रदर्शन शांतिपूर्वक संपन्न होने पर अधिकारियों ने राहत की सांस ली।
दिनभर बाधित रही इंटरनेट सेवा
विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा के मद्देनजर सहारनपुर जिले में बृहस्पतिवार आधी रात के बाद से इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। इस कारण लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। कमिश्नर संजय कुमार ने बताया कि शुक्रवार शाम 7.45 बजे इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गईं।
सांप्रदायिकता से प्रेरित है नागरिकता संशोधन बिल
जमीयत उलमा हिंद (महमूद मदनी गुट) द्वारा राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में बताया गया कि नागरिकता संशोधन विधेयक सांप्रदायिकता से प्रेरित है। हम इस कानून की निंदा करते हैं, क्योंकि उक्त विधेयक भारत की नागरिकता के लिए धर्म को कानूनी आधार बनाता है। इसका उद्देश्य पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले उत्पीड़ित अल्पसंख्यक शरणार्थियों को नागरिकता देना बताया गया है। लेकिन विधेयक धर्म के आधार पर उनमें भेदभाव करता है। यह बिल आसाम समझौते 1985 का भी उल्लंघन करता है, जो असम में अवैध रूप से आ बसने वाले विदेशियों का पता लगाने के लिए कट आफ तारीख के रूप में 25 मार्च 1971 तय करता है।