गोमतीनगर के धर्मांतरण मामले में दोषी करार दिया गया मौलाना कलीम सिद्दीकी फुलत का रहने वाला है। मौलाना पर चरथावल के अमित प्रजापति का नाम बदलकर अब्दुल्ला रखने का आरोप भी लगा था। अमित को चार लाख रुपये भी दिए थे, जिससे उसने प्लॉट खरीद लिया था।
मौलाना कलीम सिद्दीकी और उनका ड्राइवर सलीम दोषी पाए गए हैं। जबकि इदरीश ने कोर्ट से स्टे ले रखा है। एटीएस ने मेरठ से फुलत लौटते हुए सितंबर 2021 में आरोपियों को पकड़ा था। साल 2023 में मौलाना की जमानत हो गई थी। मंगलवार को सुनवाई के लिए आरोपी लखनऊ गए थे, जहां दोष सिद्ध होने पर हिरासत में ले लिए गए।
एटीएस की जांच में मौलाना के तार विदेशों से भी जुड़ हुए सामने आए थे। उमर गौतम फुलत के कलीम सिद्दीकी से पहले पकड़ा गया था। दोनों से ही कलीम सिद्दीकी के लिंक मिले थे। एटीएस की पूछताछ में सामने आया कि मौलाना के बैंक खातों में विदेशों से करोड़ों रुपये की फंडिंग हुई है।
पसंद की युवती से शादी के लालच में फंस गया अमित
चरथावल के अमित प्रजापति ने पुलिस को बताया था कि पसंद की युवती से शादी कराने का लालच देकर मई 2014 में आरोपी फुलत स्थित मदरसे में ले गए, जहां मौलाना कलीम सिद्दीकी ने कलमा पढ़वाकर उसका धर्म परिवर्तन करने के बाद नया नाम अब्दुल्ला रखा। इसके बाद उसे महाराष्ट्र जमात में ले जाकर नमाज व कलमा पढ़ना सिखाया गया था। वहां से वर्ष 2015 में उसे मदरसा देवबंद में उर्दू व अरबी भाषा सीखने के लिए भेजा गया था।
फुलत से विदेशों तक फैला रखा था जाल
मौलाना कलीम सिद्दीकी की प्रारंभिक शिक्षा फुलत गांव के मदरसे में हुई थी। पिकेट इंटर कॉलेज खतौली से विज्ञान वर्ग में इंटरमीडिएट किया। मेरठ कॉलेज, मेरठ से बीएससी पास की। सिद्दीकी की गिनती क्षेत्र के इस्लामिक विद्वानों में होती रही है। मौलाना का परिवार दिल्ली के शाहीन बाग में रह रहा है।
देश भर में था जाल, हवाला के जरिए विदेश से मंगाई थी रकम
दस्तावेजों के अनुसार दोषियों ने अवैध कार्य के लिए इस्लामिक दवाह सेंटर के अलावा डेफ सोसायटी को केंद्र बनाकर पूरे भारत में जाल बिछाया। इसमें विदेशों में बैठे आरोपियों के सहयोगियों ने हवाला के जरिए भारी धन की व्यवस्था की। आरोपियों के पास से पासपोर्ट, मोहर, साहित्य, धर्म और नाम बदलने वाले पुरुष, महिला व बच्चों की सूची, मोबाइल, लाइसेंस, पहचान पत्र, आधार, पैन, मैरिज सर्टिफिकेट और कनवर्जन रजिस्टर बरामद हुआ था।
एटीएस के दरोगा विनोद कुमार ने एटीएस थाने में 20 जून 2021 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें यह भी कहा गया था कि एटीएस को सूचना मिल रही है कि कुछ समय से देश विरोधी और असामाजिक तत्व, धार्मिक संगठन आईएसआई और विदेशी संस्थाओं के निर्देश और फंडिंग के आधार पर लोगों का धर्म परिवर्तन करके तेजी से देश की जनसंख्या संतुलन को बदल रहे हैं।
सभी 17 आरोपियों पर लगाई थी चार्जशीट
मामला दर्ज होने के बाद एटीएस ने विवेचना की और कुल 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इनमें कौसर आलम, उमर गौतम, डॉ. फराज बाबुल्लाह शाह, प्रसाद रामेश्वर कोवरे उर्फ आदम, भूप्रिय बन्दो उर्फ अरसलान मुस्तफा, मुफ्ती काजी जहांगीर कासमी, इरफान शेख, सलाहुद्दीन जैनुद्दीन शेख, राहुल भोला उर्फ प्रवीण भोला, मन्नु यादव उर्फ अब्दुल मन्नान, मो. कलीम सिद्दीकी, मो. सलीम, कुणाल अशोक चौधरी उर्फ आतिफ, मो. इदरीस कुरैशी, धीरज गोविंद राव जगताप, सरफराज अली जाफरी और अब्दुल्ला उमर शामिल हैं। चार्जशीट पर संज्ञान लेकर कोर्ट ने मामले की सुनवाई की और उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर दोषी ठहराया।