Muzaffarnagar News: कोर्ट ने नशीले पदार्थों की तस्करी के आरोपी शाजेब से जब्त 15.40 लाख रुपये रिलीज करने के प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया। साथ ही मुजफ्फरनगर के तत्कालीन एसएसपी अभिषेक सिंह समेत छह के खिलाफ आला अधिकारियों को पत्र भेजा।
विशेष न्यायालय एनडीपीएस एक्ट/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने नशीले पदार्थों की तस्करी के आरोपी शाजेब से जब्त किए गए 15.40 लाख रुपये रिलीज करने का प्रार्थनापत्र निरस्त कर दिया। गिरोह की अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति की पहचान कर जब्त नहीं किए जाने पर अदालत ने नाराजगी जताई है। तत्कालीन एसएसपी एवं वर्तमान में डीआईजी सहारनपुर अभिषेक सिंह, तत्कालीन एसपी सिटी एवं वर्तमान में कौशांबी के एसपी सत्यनारायण प्रजापत, तत्कालीन सीओ सिटी एवं वर्तमान में एसपी सिटी सहारनपुर व्योम बिंदल समेत छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ एडीजी, पुलिस मुख्यालय लखनऊ और गृह विभाग को पत्र भेजा गया है।
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शहर कोतवाली पुलिस ने दो फरवरी 2024 को अंबा विहार निवासी शाजेब समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर, उनके कब्जे से 1920 नशीले कैप्सूल, 900 इंजेक्शन, दो कार और कुल 23.69 लाख रुपये बरामद किए थे। आरोपी शाजेब की ओर से इनमें से 15.40 लाख रुपये थोक फ्रूट सप्लाई के बताते हुए रिलीज कराने के लिए दिया गया प्रार्थनापत्र इसी साल 12 फरवरी को निरस्त कर दिया गया था।
अभियुक्त के प्रार्थनापत्र पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 14 सितंबर को निचली अदालत का आदेश निरस्त कर दिया और दोबारा सुनवाई के लिए निर्देश दिए गए। एनडीपीएस एक्ट के पीठासीन अधिकारी ने मंगलवार को दोबारा सुनवाई करते हुए अभियुक्त का प्रार्थनापत्र निरस्त कर दिया।
अदालत ने लिखा कि एनडीपीएस एक्ट 1985 में केंद्रीय विधायिका की ओर से चैप्टर V-A धारा 68a से लेकर 68z में अवैध रूप से अर्जित संपत्ति की पहचान करने, उसे जब्त करने और फ्रीज करने की व्यवस्था है लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया। कोई कार्रवाई जान-बूझकर इसलिए नहीं की गई कि अभियुक्त बड़ी आसानी से न्यायालय से धनराशि रिलीज करवा लें।
तत्कालीन एसएसपी, एसपी सिटी, सीओ सिटी के अलावा कोतवाली प्रभारी महावीर चौहान, विवेचक संजय गिरी, बरामदकर्ता एसआई विनोद कुमार के खिलाफ भी पत्र लिखा गया है। अदालत ने कहा कि अभियुक्तों को लाभ पहुंचाने के लिए पुलिसकर्मियों ने ऐसा किया। पत्र की प्रति अपर मुख्य सचिव, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को भेजी गई।
यह धनराशि कागजी, एसएसपी की रही सहमति: कोर्ट
अदालत ने यह भी लिखा कि 23.69 लाख रुपये सिर्फ कागजों में वर्णित हैं, यह राशि इससे बड़ी हो सकती है। प्रतिबंधित पदार्थ और रुपये की बरामदगी जब होती है तो अधिकारियों को जानकारी होती है। एनडीपीएस एक्ट की कार्रवाई नहीं की गई, इससे निष्कर्ष निकलता है कि एसएसपी की सहमति से यह कार्य पुलिस ने किया।
अपार धन का निवेश...नहीं मिल पाता स्रोत
अदालत ने यह भी लिखा कि एनडीपीएस के प्रावधान कठोर होने के बावजूद प्रतिबंधित पदार्थ पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा और तस्करी की गतिविधियां पूर्ववत चलती रहीं। इसका प्रमुख कारण यह रहा कि प्रतिबंधित पदार्थ के व्यापार में अपार धन का निवेश किया जाता है और बहुत बड़ी मात्रा में अवैध लाभ भी कमाया जाता है, जिसका कोई भी वैध स्रोत उपलब्ध नहीं होता है। तस्कर इस अपार धन को विदेशों में जमा कर देते हैं और यह अत्यंत गोपनीय ढंग से संचालित होता रहता है। देश को इन्हीं सब गतिविधियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी पृष्ठभूमि में यह सोचा गया कि यदि अवैध संपत्ति को जब्त कर दिया जाए तो अरबों-खरबों प्रतिबंधित पदार्थ का व्यापार स्वतः समाप्त हो जाएगा।