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‘सीएए का एकजुट होकर करें विरोध’

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ईदगाह मैदान में चल रहे धरना प्रदर्शन में शामिल महिलाएं - फोटो : DEVBAND
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देवबंद (सहारनपुर)। खराब मौसम के बावजूद नागरिकता संशोधन कानून को लेकर ईदगाह मैदान में महिलाओं का धरना प्रदर्शन 48वें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारी महिलाओं ने कहा कि एनपीआर, एनआरसी का पहला कदम है। इसलिए इसका पूर्ण रुप से बहिष्कार किया जाना चाहिए, साथ ही उन्होंने प्रदेश की योगी सरकार से दूसरे राज्यों की तरह एनपीआर के खिलाफ विधेयक लाने की मांग की।
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मुत्तहिदा ख्वातीन कमेटी के बैनर तले चल रहे अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन में कमेटी अध्यक्ष आमना रोशी ने कहा कि केंद्र सरकार ने संविधान को ताक पर रखकर सीएए लागू किया है। जिसे किसी भी हाल में मंजूर नहीं किया जाएगा। असम में एनआरसी को लेकर उग्र विरोध को देखते हुए सरकार ने इसे एनपीआर के नाम से लागू किया है, जबकि सच्चाई यह है कि एनपीआर एनआरसी का पहला कदम है। उन्होंने कहा कि सरकार इसमें जिस तरह के कॉलम तैयार किए हैं उनका भर पाना नामुमकिन है। इरम उस्मानी ने एनपीआर के पूर्ण बहिष्कार का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार हठधर्मी करने पर आमादा है, जबकि देश की जनता सड़कों पर उतरकर सीएए का पुरजोर विरोध कर रही है। इसलिए सभी नागरिकों को चाहिए कि वह एकजुट होकर इसका विरोध करते हुए सरकार को इसे वापस लेने को मजबूर करें। उन्होंने कहा कि कहीं ऐसा न हो कि आने वाले समय में इस पर चुप्पी साधने वालों को पछतावा होगा और तब उनके पास डिटेंशन सेंटर में जाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचेगा। फरीहा उस्मानी और फौजिया ने कहा कि सीएए को लेकर कई राज्य इसे अपने यहां लागू करने से साफ इंकार कर चुके हैं। इसलिए प्रदेश की योगी सरकार से मांग है कि वह भी इसके खिलाफ विधेयक लाए।
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