मुजफ्फरनगर। मंसूरपर थाना क्षेत्र में छह साल की मासूम का यौन उत्पीड़न करने के दोषी रिश्ते के चाचा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। आरोप पत्र दाखिल होने के बाद अदालत ने तीन माह 19 दिन में सुनवाई पूरी हुई। विशेष अपर सत्र न्यायालय पॉक्सो एक्ट की पीठासीन अधिकारी अलका भारती ने फैसला सुनाया।
असम के रहने वाले पीड़िता के पिता और मां मंसूरपुर क्षेत्र की फैक्टरी में काम करते थे और यहीं पर मजदूरों के लिए बनाए गए आवास में रह रहे थे। इसी साल दो जनवरी की शाम को दंपती मजदूरी से लौटे तो उनकी छह साल की बेटी पड़ोसी मजदूर के कमरे के बाहर खेल रही थी।
दंपती अपने कमरे में चले गए। डेढ़ घंटे बाद दोनों वापस लौटे तो पड़ोसी और उनकी बेटी लापता थीं। कमरे की खिड़की से झांककर देखा तो बेटी का शव दिखा। ताला तोड़कर दंपती और आसपास के लोग कमरे में पहुंचे तो मासूम का शव कंबल में लिपटा पड़ा था। यौन उत्पीड़न के बाद उसकी हत्या की गई थी। पीड़ित पक्ष ने तीन जनवरी को मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने आरोपी असम के नौगांवा जिले के केवलपुरी गांव के रहने वाले आरोपी को मुठभेड़ में गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने प्रकरण में 25 अप्रैल को आरोप पत्र दाखिल किया। अभियोजन की ओर से 10 गवाह पेश किए गए। अदालत ने आरोपी पर दोष सिद्ध किया। दोषी को आजीवन कारावास और 40 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।