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डॉक्टर और दवा पर विश्वास, शास्त्रों पर नहीं : राजेंद्र

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चरथावल ठाकुरद्वारा मंदिर में कथा के दौरान भजनों पर नृत्य करतीं महिलाएं: संवाद
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मोरना। मलूक पीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्र देवाचार्य महाराज ने कहा कितने ही ब्राह्मण जनेऊ और चोटी नहीं रखते। जब ब्राह्मण गोपालन नहीं कर रहे हैं तो क्षत्रिय और वैश्य ही क्यों करेंगे। भगवान ने हमें यज्ञोपवीत संस्कार में जन्म दिया। किसी भी जप अनुष्ठान का फल तभी मिलेगा, जब वह विधिवत हो। डॉक्टर और दवाओं पर विश्वास है, लेकिन शास्त्रों पर नहीं। भगवान कहते हैं तुम मेरी शरण में आ जाओ दुख और अग्नि रूपी संकट को मैं पी जाऊंगा।
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शुकतीर्थ के हनुमत धाम में चल रही कथा में उन्होंने कहा कि दाता को उदार होना चाहिए। गाय की जगह भैंस का पालन हो रहा है। वही होना चाहिए जिसकी आवश्यकता हो। आहार जितना शुद्ध होगा अंतकरण भी उतना पवित्र होगा। आहार चिंतन का भारतीय संस्कृति में जितना ऋषियों ने चिंतन किया है, विश्व में किसी ने नहीं किया। जिस वस्तु से भगवान काे भोग नहीं लगता, वह खाने योग्य नहीं। पहले तो मानव धर्माचरण नहीं कर रहे। शास्त्र आचरण के बिना लाभ नहीं होने वाला। गुरु को कभी नाम से ना पुकारें। आदर और सत्कार दें, विवेक रखें। चार पीढ़ी तक विचार करें, शिष्य का नाम भी गुरु के नाम पर ना रखें वरना यह गुरुकुल परंपरा मर्यादा का उल्लंघन होगा।
दूसरों के गुणों में अवगुण निकलने वाले कभी परमात्मा को को साध नहीं सकते। काल से छूटने पर ब्राह्मण को स्वर्ण गोदान करें, विश्व गोदान सर्वश्रेष्ठ दान माना गया। गोशाला बनाकर चरने योग्य भूमि देकर जो गोदान करता है, उसे संपूर्ण दान माना गया। कथा में स्वामी आनंद स्वरूप सरस्वती, स्वामी विज्ञानंद महाराज, स्वामी गीतानंद तीर्थ, स्वामी गीतानंद गिरी, स्वामी भक्ति भूषण दास महाराज, सर्वेश पन्नाचार्य, सीताराम शास्त्री मौजूद रहे।
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भगवान का ग्रंथ अवतार है भागवत: शास्त्री

ककरौली। कथा व्यास अचल कृष्ण शास्त्री ने कहा कि तीन चीजों का मिलना बहुत दुर्लभ है। मानव देह, मुमुक्षा और भागवत कथा। मनुष्य देह पाकर, मुमुक्षा की इच्छा से भागवत कथा का आयोजन करना परम सौभाग्य का विषय है। शुकतीर्थ के शुकदेव आश्रम के गीता भवन में कथा व्यास ने कहा कि भागवत भगवान का ग्रंथ अवतार है, जिसमें मनुष्य की सभी समस्याओं का निदान छिपा हुआ है। सत्संगति में रहना, भगवद् भक्ति करना तथा लोक हित के लिए जीना ही जीवन का परम लक्ष्य है। कलियुग में भागवत आयोजन सर्वश्रेष्ठ यज्ञ है। भागवत मनुष्य को पुरुषार्थी और परमार्थी बनाकर प्रभु चरणों की भक्ति में लगा देती है। भागवत सभी सिद्धांतों का निष्कर्ष है। मुख्य यजमान जुगल किशोर मनिहार रहे। संवाद

चरथावल ठाकुरद्वारा मंदिर में कथा के दौरान भजनों पर नृत्य करतीं महिलाएं: संवाद

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