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ट्रेनों के रद्द होने से यात्रियों की मुसीबत, रोडवेज बसों का संचालन भी लड़खड़ाया

Tue, 03 Apr 2018 12:33 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
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रेलवे स्टेशन पर दहशतजदा परिवार। - फोटो : अमर उजाला
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दलितों के आंदोलन के कारण कई जिलों में भड़की हिंसा के बीच रेल मंत्रालय को 12 से अधिक ट्रेनों को रद्द करना पड़ा। इतना ही नहीं मेरठ और टपरी से एक्सप्रेस समेत दो ट्रेनों को वापस भेजनी पड़ी। रोडवेज डिपो की बसों का संचालन बंद कर दिया गया था।
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मंसूरपुर में दलितों ने हाइवे पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ तैनात रही, जबकि रोडवेज डिपो, पेट्रोल पंपों, बैंकों के अलावा जगह जगह पुलिस बल तैनात रहने से दहशत का माहौल रहा।  उधर, नगर में बंद का कोई असर दिखाई नहीं पड़ा। 

एससी-एसटी एक्ट में बदलाव करने के विरोध में जय भीम सेेना, भीम आर्मी समेत दलितों के अन्य संगठनों ने दो अप्रैल को भारत बंद का आह्वान करते हुए आंदोलन की घोषणा की थी। दलितों के आंदोलन के दौरान कई राज्यों में भड़की हिंसा के मद्देनजर रेल मंत्रालय ने सोमवार को सुबह 10 बजे के बाद दर्जनों ट्रेनों का संचालन रद्द कर दिया था।
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हरिद्वार पैसेंजर ट्रेन को दिल्ली जाने से टपरी में रोककर वापस भेज दिया गया। देहरादून एक्सप्रेस ट्रेन को मेरठ से वापस किया गया।

दोपहर 3.33 बजे मुजफ्फरनगर की ओर से आ रही हरिद्वार-कोच्चिवली एक्सप्रेस ट्रेन को यात्रियों ने चेन पुलिंग करके स्टेशन पर रोक दिया। इस ट्रेन से कुछ यात्री उतरे, जबकि इस ट्रेन का स्टेशन पर स्टॉपेज भी नहीं है। पांच मिनट बाद ट्रेन को रवाना किया गया।

खतौली रोडवेज डिपो की बसों का संचालन भी बंद कर दिया गया था। नतीजतन आवागमन के दौरान यात्रियों को भारी परेशानियां उठानी पड़ी। मंसूरपुर क्षेत्र में मुख्यालय जाते समय दलितों ने हाइवे पर कुछ देर के लिए जाम लगाकर प्रदर्शन किया।

प्रदेश में हाई अलर्ट के मद्देनजर रोडवेज बस अड्डे, बैंकों व पेट्रोल पंपों पर सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा के लिए आरपीएफ तैनात रही। दिनभर हाइवे बिल्कुल सुनसान पड़ा रहा।

इंस्पेक्टर अंबिका प्रसाद भारद्वाज हाइवे के अलाव मुख्य मार्गों पर गश्त करते रहे। शाम को पांच बजे के बाद इक्का-दुक्का रोडवेज बस चलीं। नगर में बंद का कोई असर दिखाई नहीं दिया। हालांकि साप्ताहिक बंदी की वजह से काफी दुकानें बंद रही। जीटी रोड व जानसठ रोड पर दुकानें यथावत खुली रहीं। हिंसा की घटनाओं से लोगों में दहशत का माहौल बना रहा। 
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