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निर्माण के छह साल बाद भी किसी काम का नहीं ट्रामा सेंटर

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खतौली में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में बनाई ट्रामा सेंटर की बिल्डिंग। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर, खतौली। दिल्ली-देहरादून हाईवे पर नगर में बनाए गए ट्रॉमा सेंटर से लोगों को लाभ नहीं हुआ है। संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए और स्टाफ की तैनाती नहीं हुई। न्यूरो सर्जन नियुक्ति नहीं है। आईसीयू की सुविधा नहीं, जिस कारण मरीजों को हायर सेंटर के लिए रेफर किया जाता है। विधानसभा में मुद्दा गूंजा, लेकिन समाधान नहीं हुआ।
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दिल्ली-देहरादून हाईवे पर कस्बा खतौली में ट्रॉमा सेंटर बनाया गया था। 1,88,36,000 रुपये खर्च कर ट्रॉमा सेंटर के भवन को तैयार कर दिया गया। इसका उद्घाटन भी 19 जुलाई 2016 को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ऑनलाईन कर दिया था, लेकिन यहां छह साल बाद भी स्टाफ तैनात नहीं है। डॉक्टर, पैरा मेडिकल स्टाफ, उपकरण, मेडिसन, सर्जन, डेंटल चिकित्सक, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर, बल्ड बैंक, पैथोलोजिस्ट 24 घंटे जांच की सुविधा, सीटी स्केन, एमआरआई की कोई सुविधा उपलब्ध नही है।
क्या कहते हैं अधिकारी
- सीएमओ डॉ. महावीर सिंह फौजदार का कहना है कि न्यूरो सर्जन नहीं है। इसके अलावा संसाधनों की कमी है, जिन्हें पूरा कराने का प्रयास है। खतौली में हाईवे की वजह से स्थान चुना गया था, जल्द ही लोगों को सुविधा मिलेगी।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. पुष्पेंद्र कुमार का कहना है कि सीएचसी का स्टाफ ट्रॉमा सेंटर में बैठकर ओपीडी करता है, सड़क दुर्घटना का मामला आता है, तो प्राथमिक उपचार दिया जाता है। उन्होंने बताया कि ट्रॉमा सेंटर पर हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ अनिरुद्ध सिंह की ही पोस्टिंग है, अन्य स्टाफ नही है।
क्या कहती है जनता
खतौली के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में ट्रॉमा सेंटर का निर्माण तो किया गया, लेकिन इसका उपयोग नही हुआ। इस प्रकार यह जनता के पैसे की बर्बादी है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए था। - अभिषेक गोयल
ट्रॉमा सेंटर निर्माण के छह साल बाद भी वह एक बिल्डिंग के रूप में खड़ी है। इसमें ट्रॉमा सेंटर की कोई सुविधा नही है। सड़क दुर्घटना होने पर यदि यात्री गंभीर घायल हो जाता है तो उसे यहां पर कोई सुविधा नही मिलती, मात्र प्राथमिक उपचार के बाद भेज दिया जाता है। जिससे मरीज की जान खतरे में पड़ जाती है। - निवेश राणा, ब्लाक अध्यक्ष कांग्रेस
जनता को ट्रॉमा सेंटर का सपना दिखाया गया, लेकिन यह पूरी तरह संचालित नही किया गया। यदि यह ट्रॉमा सेंटर चालू होता तो मरीजों को दूसरे शहरों में नही जाना पड़ता। कम खर्च होता और अच्छा उपचार मिलता। - राकेश चौधरी भाकियू नेता
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