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Muzaffarnagar News: स्वर्ग का सपना दिखाकर नरक में धकेले, कुत्तों से फड़वाया, भालों से गोदा

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मांडी गांव की फैक्टरी में बिखरे दोदोना-पत्तल : संवाद - फोटो : 1
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- गेट पर बंधा पिटबुल, बेल्ट की पिटाई याद आते ही सिहर उठते हैं मजदूर
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- मजदूर राज हंस ने दुखी मन से कहा- फैक्टरी मालिकों को कड़ी से कड़ी सजा मिले

संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर/तितावी। मांडी गांव फैक्टरी के गेट पर बंधा पिटबुल और आपस में बात करने के प्रयास पर ही बेल्ट व लोहे के सुए से हमले का मंजर याद आते ही मजदूर सिहर उठते हैं। बंधन मुक्त कराए गए मजदूर बताते हैं कि उन्होंने तो उम्मीद ही छोड़ दी थी। मजदूर राज हंस ने कहा कि उनकी आंखों से नींद गायब हो गई। आरोपियों ने रेलवे स्टेशन और बस अड्डोंं से स्वर्ग का सपना दिखाकर नरक में धकेल दिया। कुत्तों से फड़वाया गया और भालों से भी गोदा गया।
मांडी की दोना बनाने की फैक्टरी में बंधक बनाकर काम करने वाले मजदूर आज आजाद माहौल में खुली हवा में सांस ले रहे हैं। मजदूर दिलशाद बताता है कि उन्हें खाने के लिए चोकर वाली दो सूखी रोटी दी जाती थी। 24 घंटे काम लिया जाता था।
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वह चार माह पहले यहां आया था। गेट पर कभी एक तो कभी दो पिटबुल कुत्ते बांध जाते थे, बेल्ट से पीटते थे। उज्ज्वल बताता है कि उसे फैक्टरी का सुपरवाइजर अंबाला कैंट से लाया था। तीन समय चाय नाश्ता दस हजार रुपये वेतन देना बताकर लाया गया लेकिन यहां बंधक बनाकर 24 घंटे काम कराया गया। सूखी रोटी देकर मारपीट करते थे।
मजदूर संतोष से बताया कि वह अंबाला से घर जा रहा था। फैक्टरी का सुपरवाइजर शिवा अंबाला रेलवे स्टेशन पर मिला। 14 हजार रुपये वेतन देना कह कर आराम वाला काम बताते हुए लेकर आया। यहां लाकर बंद कर दूसरे दिन से ही पीटना शुरू कर दिया।
दस माह हो गए, एक भी पैसा नहीं दिया। उन सभी मजदूरों ने एक साथी को वहां से भगाया। राज हंस ने कहा कि पानी को पीनी मिला लेकिन एक कप चाय भी नहीं दी गई। आरोपी लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिले।
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एसआईटी सहित पांच टीम कर तलाश रही, आरोपियों के घर लटके ताले
पुलिस ने बारह मजदूरों को बंधन मुक्त कराया है। इस मामले में मानव तस्करी, श्रम अधिनियम, बंधक बनाने, बाल श्रम सहित कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज है। एक मजदूर की फैक्टरी में मारपीट से मौत होने के बाद उसके शव को फेंका गया था। इसी के चलते गैर इरादतन हत्या की धारा का इजाफा किया गया है। एसआईटी सहित पुलिस की पांच टीम फैक्टरी मालिक अंकित बालियान सहित दो आरोपियों को तलाश रही हैं, उनके घर पर ताले लगे हैं । पुलिस ने मंसूरपुर, दधेड़ू में रिश्तेदारों के घरों पर दबिश दी लेकिन आरोपियों का पता नहीं लगा सका। सभी आरोपी ताले लगाकर घर से भागे हुए हैं।
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इनके हुए आज बयान
सीओ फुगाना विश्वजीत सिंह ने बताया कि बुधवार को बिहार निवासी राज हंस, संतोष, उज्जवल, औरैया निवासी शिवम, अमरोहा निवासी दिलशाद, छत्तीसगढ़ का नारायण, आगरा निवासी सोनू चौहान, नैनीताल निवासी रामू के कोर्ट में बयान दर्ज कराए हैं। सभी ने अपनी परेशानियों के बारे में बताया है। मंगलवार को बिहार निवासी जगदीश, रंजीत, साहिल व राजस्थान निवासी विक्रम के बयान दर्ज कराए गए थे।
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इनके परिवार के सदस्य पहुंचे मिलने
बृहस्पतिवार को राज हंस का बहनोई बिहार निवासी गणेश मिश्रा, रंजीत का भाई बिहार से रणधीर, संतोष का साला बिहार निवासी छोटे लाल व दिलशाद का पड़ोसी अमरोहा निवासी राजीव शर्मा थाने पहुंचे हैं। अपनों को देखकर उन्होंने गले से लगाया। उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े। सभी ने पुलिस का आभार जताया।
राज हंस के बहनोई गणेश मिश्रा ने बताया कि आठ माह पहले वह सिलिंडर व सामान बेचकर घर से भाग आया था। रंजीत के भाई रणधीर का कहना है कि रंजीत काम की तलाश में आया था। संतोष के साला छोटे लाल का कहना है कि सबकी सहमति से वह काम की तलाश में आया था।
काफी दिनों से वह उसे तलाश रहे थे। दिलशाद के पड़ोसी राजीव शर्मा ने बताया कि काम छूट गया था इसलिए वह काम के लिए आया था। यहां आकर देखा तो वह काफी चोट लगी हैं।
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सभी मजदूरों के परिजनों को सूचना कराई हैं। कुछ के परिजन आए हैं। सभी खुश हैं। मजदूरों के बयान कोर्ट में दर्ज कराए जा रहे हैं। उन्हें आर्थिक मदद के लिए एक-एक लाख रुपये भी दिए जाएंगे। आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है। - विश्वजीत सिंह, सीओ फुगाना
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इस तरह भागा विक्रम...मजदूरों की हुई पिटाई
मजदूरों ने बताया कि फैक्टरी का सुपरवाइजर शिवा शराब पीने चला गया। मालिक अंकित बालियान उस समय फैक्टरी में नहीं था। मालिक का पिता प्रदीप सामान लेने आया। फैक्टरी में दो गेट थे। एक का बंद कर वह काम करते थे। बिजली चली जाने पर ही आराम मिलता था। प्रदीप फैक्टरी में आया तो उसको चकमा देकर विक्रम को बाहर परिसर में निकाल दिया। उसके ऊपर तिरपाल डालकर उसे छिपा दिया। प्रदीप के जाने के बाद विक्रम दीवाकर कूदकर भाग गया। तीन लोगों ने उसका पीछा भी किया लेकिन वह ईख में छिप गया और बाद में तितावी थाने जा पहुंचा था। शिवा ने आकर कैमरे देखे और विक्रम को न पाकर सभी की पिटाई की थी।
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ये था मामला
तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव में दोना बनाने की फैक्टरी में विभिन्न राज्यों से आए इन श्रमिकों को रेलवे स्टेशन से नौकरी, वेतन, भोजन और रहने की सुविधा का प्रलोभन देकर फैक्टरी में लाया जाता था। बंधुआ मजदूर बनाकर दिन में एक बार सूखी रोटी देकर 24 घंटे काम कराया जाता। वेतन मांगने एवं बाहर जाने की बात पर नुकीले डंडों से मारपीट की जाती थी। पिटबुल कुत्तों से भी डराया जाता था। डेढ़ साल से मजदूर बंधक थे। मजदूर विक्रम किसी 22 जून को किसी तरह फैक्टरी से भागकर तितावी थाने पहुंचा। इसके बाद 23 जून को पुलिस और श्रम विभाग की टीम ने मजदूरों को बंधनमुक्त कराया था।

मांडी गांव की फैक्टरी में बिखरे दोदोना-पत्तल : संवाद- फोटो : 1

मांडी गांव की फैक्टरी में बिखरे दोदोना-पत्तल : संवाद- फोटो : 1

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