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विधायक के गांव कवाल में बने जीआईसी में नहीं होती पढ़ाई

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कवाल में तैयार राजकीय इंटर कॉलेज का भवन। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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विधायक के गांव कवाल में बने जीआईसी में नहीं होती पढ़ाई
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मुजफ्फरनगर। सूबे की भाजपा सरकार के विकास के दावे धरातल पर यहां दिखाई नहीं पड़ते। भाजपा सरकार का दिनरात गुणगान करने वाले पार्टी के खतौली से विधायक विक्रम सिंह सैनी के गांव कवाल में ही स्थित जीआईसी में पढ़ाने के लिए काफी अरसे से शिक्षक नहीं हैं। इसके अलावा जिले में तीन जीआईसी की बिल्डिंग चार साल से तैयार खड़ी है। इन कॉलेजों में पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं हैं।
केंद्र की कांग्रेस के कार्यकाल में मनमोहन सिंह सरकार ने मुस्लिम बहुल जिलों में मल्टीसेक्टोरल स्कीम शुरू की थी। इस स्कीम के तहत जिले में 16 जीआईसी स्वीकृत हुए। तीन आईटीआई और एक पालीटेक्निक मंजूर हुई। जीआईसी की स्वीकृति गांव गढ़ी सखावत, सफीपुर पट्टी, कम्हेड़ा, पुरबालियान, जौली, बुड़ीना खुर्द, बिराल, मेहलकी, मुथरा, बहादरपुर, कवाल, कल्याणपुर, जड़ौदा, कसेरवा, पुरकाजी देहात, तुगलकपुर कम्हेड़ा में हुई। इनमें दस कॉलेजों में शिक्षण कार्य 24 जनवरी 2018 से चल रहा है।
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दो कॉलेजों तुगलकपुर कम्हेड़ा और जड़ौदा का निर्माण कार्य चार साल से अधर में लटका है। निर्माण कार्यों के लिए धनराशि की कमी बताई जाती है। चार जीआईसी 2018 से ही तैयार खड़े हैं, इनका आज तक शुभारंभ नहीं हो पाया है। इसी तरह तीन में से एक आईटीआई छपार का निर्माण अधूरा पड़ा है। दो आईटीआई कसेरवा और भोपा चल रही है। गांव जटवाडा में पालीटेक्निक और छात्रावास का कार्य भी चार साल से अधूरा है। यहां सबसे बड़ी बात यह है कि जो चार जीआईसी अधूरे हैं, इनमें कवाल, कसेरवा, कल्याणपुर और बहादरपुर का जीआईसी शामिल है। कवाल खतौली के भाजपा विधायक विक्रम सैनी का का मूल गांव है। वह इसी गांव में रहते हैं। विधायक अपने गांव में चार साल से तैयार कॉलेज में टीचर की व्यवस्था नहीं करा पाए हैं। वह डीएम से लेकर मुख्यमंत्री तक को पत्र लिख चुके हैं। इतना जरूर हुआ कि उनके गांव का यह कॉलेज डेढ़ साल तक अस्थाई जेल जरूर रहा है।
15 सितंबर को अस्थायी जेल बंद हुई
मुजफ्फरनगर। एडीएम प्रशासन अमित सिंह ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान कवाल के जीआईसी को जेल बनाया गया था। मार्च 2020 से लेकर 15 सितंबर 2021 तक यहां जेल रही है। फिलहाल यहां अब कोई कैदी नहीं है।
शासन को भेज चुके हैं पत्र
मुजफ्फरनगर। डीआईओएस गजेंद्र कुमार का कहना है कि जिले के चार जीआईसी 2018 से तैयार खड़े हैं। इनमें शिक्षकों की नियुक्ति के लिए उनके विभाग और डीएम की ओर से शासन को कई पत्र जा चुके हैं। शिक्षक नहीं मिलने से इन कॉलेजों में पढ़ाई शुरू नहीं हो पाई है।
वर्ष 2018 में योगी को लिखित में दिया था
खतौली विधायक विक्रम सैनी का कहना है कि प्रदेश में जब भाजपा की सरकार बनी, तो कॉलेज में शिक्षकों के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा था। वह लगातार प्रयास कर रहे हैं। अगले सत्र से यहां शिक्षकों के आने की संभावना है।
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बच्चों को हो रही परेशानी
कवाल के प्रधान के पति इस्लाम का कहना है कि गांव में कॉलेज की बिल्डिंग तैयार खड़ी है। हम भी कई बार डीआईओएस के यहां लिखकर दे चुके हैं। गांव के बच्चों को लंबी दूरी तय कर पढ़ने के लिए जाना पड़ रहा है। अब पता नहीं सरकार शिक्षकों की तैनाती कितने दिन बाद करेगी।
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