फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Muzaffarnagar News: करवे का पानी, वीर बहादुर की खामोशी...टिकैत की ललकार

विज्ञापन
अमर उजाला में 12 अगस्त 1987 के अंक में प्रका​शित समाचार। फोटो में चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत और त
विज्ञापन
मदन बालियान
विज्ञापन

मुजफ्फरनगर। किसान आंदोलन के इतिहास में 11 अगस्त 1987 की तारीख हमेशा याद रखी जाएगी। जनता इंटर कॉलेज सिसौली के मैदान पर तपती दोपहर में खुले आसमान के नीचे जुटे लाखों किसानों के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह पहली बार पहुंचे थे। शोर-शराबे के बीच मंच से सीएम ने कोई घोषणा नहीं की तो किसान नाराज हो गए। किसान मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने आरपार का एलान कर दिया। करवे से पानी पिलाने का किस्सा भी अपने-अपने ढंग से गढ़ा गया।
वर्ष 1986 में देशखाप के गढ़ बड़ौत से किसानों ने एकजुटता की हुंकार भरी। शामली के करमूखेड़ी से भाकियू का आंदोलन इतना मजबूत हुआ कि 11 अगस्त 1987 को मुख्यमंत्री ने सिसौली में किसानों के बीच समझौता वार्ता में पहुंचने पर सहमति दी। किसानों के बीच लोकप्रियता खो रही कांग्रेस के लिए यह बड़ी पहल थी। तय किया गया था कि किसानों की कुछ मांगों पर मुख्यमंत्री सहमति देंगे। देशी अंदाज में स्कूल के कमरे की छत पर मंच और खुले आसमान के नीचे बैठे किसानों के बीच वीर बहादुर सिंह असहज हो गए। भाषण खत्म हुआ तो कोई घोषणा नहीं थी। मंच पर ही किसानों के लिए टिकैत प्रदेश के मुख्यमंत्री के सामने अड़ गए।
विज्ञापन

एक मंच पर सत्ता और किसानों के बीच यह बड़ा टकराव था। मुख्यमंत्री भी खाली हाथ लौटे और किसानों को भी कुछ नहीं मिला। अब 38 साल बीत चुके हैं, लेकिन वीर बहादुर सिंह के सिसौली आने और करवे पर खूब किस्से गढ़े गए। असल में टिकैत ने करवे को किसानों का फ्रिज बताते हुए कहा था कि यहां गिलास से नहीं हाथ से ओक बनाकर पानी पीते हैं।
-
इनसेट
मंच पर ही बिगड़ गया था संवाद
किसान आंदोलन में चौधरी टिकैत की भूमिका पुस्तक के लेखक अशोक बालियान बताते हैं कि मंच पर संवाद बिगड़ गया। किसान चाहते थे कि मौके पर ही कोई घोषणा की जाए, लेकिन वीर बहादुर सिंह खामोश हो गए। इसी वजह से महापंचायत से किसान खाली हाथ लौटे।

इनसेट
इस तरह सिसौली आए सियासत के दिग्गज
- 11 अगस्त 1987 : तत्कालीन सीएम वीर बहादुर सिंह
- 29 मई 1990 : तत्कालीन उप प्रधानमंत्री देवीलाल
- 11 दिसंबर 1990 : तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर
- 15 सितंबर 1994 : सीएम मुलायम सिंह पहुंचे
- 09 अगस्त 1996 : तत्कालीन प्रधानमंत्री देवगौड़ा
- 04 मार्च 2001 : पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह
-
इनसेट
उस दिन उम्मीद लेकर आए थे किसान
फोटो
परेई गांव के किसान रामपाल सिंह बताते हैं कि बिल, लगान और आबपाशी के मुद्दे पर किसानों को बड़ी घोषणा की उम्मीद थी, लेकिन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह खामोश हो गए। इसी वजह से किसानों ने उनका विरोध कियाथा। टिकैत ने खुले मंच से कहा था कि किसानों की मांगों को पूरा किया जाना चाहिए।
विज्ञापन

-

इनसेट
11 लाख इकट्ठे हुए, शाम को खुलवाना पड़ा बैंक
जनपद जाट महासभा के जिलाध्यक्ष धर्मवीर बालियान बताते हैं कि एतिहासिक पंचायत का समापन सकारात्मक नहीं रहा था। यह पहला मौका था, जब मुख्यमंत्री और किसान आमने-सामने धूप में बैठे थे। देशभर से आए किसानों ने चंदा देना शुरू किया तो शाम तक करीब 11 लाख रुपये एकत्र हो गए। बैंककर्मी को बुलाकर रुपये खाते में जमा कराए गए थे।

अमर उजाला में 12 अगस्त 1987 के अंक में प्रकाशित समाचार। फोटो में चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत और त

अमर उजाला में 12 अगस्त 1987 के अंक में प्रकाशित समाचार। फोटो में चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत और त

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें