तहसील से गंगनहर पटरी जाने वाली सड़क बदहाल
मुजफ्फरनगर, खतौली। गन्ना विभाग द्वारा बनाई गई सड़क पूरी तरह से टूट चुकी है। यह सड़क कई गांवों को तहसील के सामने से होकर शुगर मिल से जोड़ती है। आलम यह है कि यदि इस रोड से कार जाती है तो उसमें नुकसान होने का भय बना रहता है। इसलिए कार चालक इस रोड का प्रयोग करने से बच रहे हैं।
गंगनहर पटरी मार्ग पर लोहे के पुल के समीप से एक मार्ग गन्ना विभाग द्वारा लगभग तीन साल पहले बनवाया गया था। इस मार्ग के बनने से कई गांवों के किसानों को मिल में गन्ना लेकर पहुंचने पर आसानी होने लगी। नगर में जाम की स्थिति भी कम बनती है। इस मार्ग के बराबर से जा रही रेलवे लाइन पर रेलवे का काम चल रहा है। नतीजतन रेलवे के भारी वाहनों का आना जाना भी है। यह सड़क काफी जगह पूरी तरह से टूट चुकी है। इस मार्ग से तहसील आने जाने वाले राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
क्या कहते हैं नागरिक
- खतौली भूड़ निवासी नवीन उपाध्याय का कहना है कि यह मार्ग बनने से तहसील आने वाले लोगों को राहत मिल रही थी। सोंटा, सराय, दूधाहेडी, बुआडा आदि गांव के लोग इस मार्ग से कुछ ही देर में तहसील पहुंच जाते थे, लेकिन अब उन्हें घूमकर आना पड़ रहा है।
- बेगराजपुऱ के संदीप तोमर का कहना है कि मंसूरपुर, नावला, खानुपुर, जसौला, घासीपुरा, बोपाड़ा, पुरबालियान सहित आदि गांव के लोग तहसील आने के लिए गंगनहर पुल से गंगनहर पटरी पर आकर इस मार्ग से आसानी से जल्दी तहसील में पहुंचते थे, लेकिन गहरे गड्ढे होने के कारण इस मार्ग को इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। अब घूमकर तहसील आना पड़ता है।
- अंतवाड़ा के बाबूराम का कहना है इस मार्ग को रेलवे के बड़े वाहनों ने तोड़ दिया है। इस मार्ग से किसान भी अपने वाहन ले जाने से बच रहे है। गंगनहर पटरी मार्ग से जानसठ, भोपा, हरिद्वार की ओर से आने वाले ग्रामीण इसी मार्ग का प्रयोग कर ताजपुर, अंतवाड़ा, बुआड़ा, गंगधाड़ी, भूड़ आदि गांवों में जाते हैं।
किसान पाठशाला के लिए मास्टर ट्रेनर तैयार किए
मुजफ्फरनगर। उप कृषि निदेशक कार्यालय के सभागार में किसान पाठशाला के लिए मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित करने के लिए प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में कृषि के साथ-साथ कृषि के सहयोगी विभागों के अधिकारियों के साथ ही कृषि विज्ञान केंद्र बघरा के वैज्ञानिकों ने प्रशिक्षण दिया। अरविंद कुमार ने प्रशिक्षण प्रारंभ किया। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ श्रीपाल राणा ने गन्ने की फसल की नवीनतम उत्पादन तकनीकी जानकारी देने के साथ ही गन्ने की फसल में लगने वाले कीट एवं रोगों की से बचाव के बारे में बताया। भूमि संरक्षण अधिकारी तुलसीराम प्रजापति ने भूमि संरक्षण अनुभाग द्वारा संचालित कृषक हितार्थ योजनाओं की जानकारी दी। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. नीरज ने पशुओं में होने वाले रोग, उनके लक्षण एवं पशुओं के रोगों के निदान के संबंध में बताया। उपकृषि निदेशक आरपी चौधरी ने कृषक उत्पादक संगठन के गठन के संबंध में जानकारी दी।