डाक्टर और मरीजों के बीच विश्वास का रिश्ता जरूरी
मुजफ्फरनगर। चिकित्सक को दूसरे भगवान का दर्जा दिया गया, लेकिन बीते कुछ वर्षों से चिकित्सा कार्य में बढ़ती व्यावसायिकता ने मरीज और डाक्टर के बीच विश्वास के रिश्ते को कमजोर किया है, जो मजबूत होना चाहिए। देखने में आता है कि यदि कोई अनहोनी हो जाए तो मरीज के परिजन अस्पताल में तोड़फोड़ और चिकित्सकों से मारपीट करने से भी नहीं चूकते। डाक्टर और मरीजों के बीच बढ़ रहे अविश्वास को लेकर अमर उजाला की टीम ने चिकित्सकों से बात की तो उन्होंने दोनों ही तरफ सुधार को जरूरी बताया।
दोनों ही पक्षों में तालमेल की जरूरत: डा. वीके जौहरी
मुजफ्फरनगर। पूर्व सीएमएस डा. वीके जौहरी कहते हैं कि लोगों की चिकित्सकों से अपेक्षाएं बढ़ी हैं जबकि धरातल पर उतनी सुविधाएं नहीं हैं। सरकारी सेवा के चिकित्सकों को चाहिए कि अपने पास उपलब्ध संसाधनों का भरपूर लाभ जनता को नि:शुल्क दें। लोग इस उम्मीद में अस्पताल आते हैं कि उनकी बात कोई सुनेगा लेकिन यदि उनसे अच्छा व्यवहार न हो तो उनका विश्वास टूटता है। प्राइवेट चिकित्सक भी रोगियों का हर संभव तरीके से उपचार करें और फीस को संतुलित करने की कोशिश करें। मरीजों को भी समझने की जरूरत है। दोनों ही पक्ष एक-दूसरे की मजबूरियों को समझें तो ही बेहतर होगा।
मरीज शत प्रतिशत रिजल्ट चाहते हैं: डा.रवींद्र जैन
मुजफ्फरनगर। आईएमए मुजफ्फरनगर के अध्यक्ष डा. रवींद्र जैन कहते हैं कि जैसे-जैसे साइंस से तरक्की की है, मरीजों की उम्मीदें चिकित्सकों से बढ़ी हैं। वे शत-प्रतिशत परिणाम चाहते हैं और जब अपेक्षा के अनुरूप परिणाम नहीं निकलते तो हंगामा एवं मारपीट तक की घटनाएं हो जाती हैं। कई बार कुछ बिना डिग्रीधारकों की लापरवाही से कोई अनहोनी हो जाती है लेकिन उसका प्रचार ऐसे होता है कि डाक्टर की लापरवाही से घटना हुई। इससे भी जनता के मन में डाक्टरों के प्रति नकारात्मक भाव पनपता है। इसका खामियाजा भी चिकित्सकों को भुगतना पड़ता है। आपसी विश्वास को मजबूत करने के लिए दोनों ही पक्षों को समझने की जरूरत है।
कोरोना महामारी में देवदूत बने चिकित्सक
मुजफ्फरनगर। कोरोना महामारी के बीच चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टॉफ का योगदान अतुलनीय है। अपने जीवन की परवाह किए बगैर चिकित्सक मरीजों की सेवा में जुटे हैं।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. लोकेश गुप्ता दूसरों को मोटिवेट करते रहे और अपनी टीम के साथ हरदम जुटे रहे। शुरुआत में सिसौली से आने वाले सबसे गंभीर मरीज को डॉ. लोकेश ने बहुत ही मेहनत से संभाला। इतना ही नहीं प्रत्येक केस का जमीनी स्तर पर अध्ययन कर रिपोर्ट भी तैयार की। 23 मार्च के बाद से लगातार परिवार से दूर रहकर काम कर रहे हैं।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डा. योगेंद्र त्रिखा कोरोना महामारी की शुरुआत से ही चिकित्सा की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। जिला अस्पताल में बने आइसोलेशन वार्ड की जिम्मेदारी उन्हीं पर है। उन्होंने स्वयं का बचाव करते हुए अस्पताल में आने वाले संदिग्ध मरीजों को संभाला। कोरोना संदिग्धों के सैंपल लेने के साथ ही उन्हें जरूरत के हिसाब से उपचार मुहैया कराया।
डाक्टर रविंद्र जैन- फोटो : MUZAFFARNAGAR
डाक्टर लोकेश चंद गुप्ता।- फोटो : MUZAFFARNAGAR
डाक्टर योगेंद्र त्रिखा।- फोटो : MUZAFFARNAGAR