मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड से जुड़े सीबीआई बनाम ब्रजकिशोर मामले में बहस जारी रही। बचाव पक्ष की ओर से आंदोलनकारियों से हथियारों की बरामदगी को फर्जी बताया गया। कोर्ट की ओर से अगली सुनवाई की तिथि 11 नवंबर निर्धारित की गई।
एक अक्तूबर 1994 को पृथक राज्य गठन की मांग के लिए देहरादून से दिल्ली जा रहे आंदोलनकारियों की बसों को छपार थाना क्षेत्र के रामपुर गांव के समीप पुलिस ने रोक लिया था। इसके बाद आंदोलनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई थी। पुलिस फायरिंग में सात आंदोलनकारियों की मौत हुई थी, जबकि कई महिला आंदोलनकारियों के साथ दुष्कर्म और छेड़छाड़ का आरोप लगा था। सीबीआई की ओर से आंदोलनकारियों से हथियारों की फर्जी बरामदगी दर्शाने और एक आंदोलनकारी का शव गंग नहर में बहाए जाने के मामले की जांच कर छपार थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसके बाद विवेचना कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई थी। बृहस्पतिवार को कोर्ट में सीबीआई बनाम बृजकिशोर मामले में बहस जारी रही। बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि आंदोलनकारियों से हथियारों की बरामदगी फर्जी थी।