बघरा में दरगाहे आलिया में मजलिसों में मौजूद लोग।
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मुजफ्फरनगर, तितावी। शनिवार को बघरा की दरगाहें आलिया में तीसरे दिन भी मजलिस हुई। सुबह की मजालिस सुबह 9 बजे शुरू हुई। जिसमें मौलाना उरूज मेंहदी ने खिताब फरमाया।
मौलाना ने बाद में हजरत अब्बास (आ,स) की शहादत का वाकिया पेश किया, जिसे सुनकर शिया अजादार जार जार रोये। दूसरी मजलिस मौलाना मजाहिर सिकंदरपूरी ने खिताब की। उन्होंने कहा कि दरगाहें आलिया बघरा एकता का मरकज है। यहाँ सभी संप्रदाय के लोग आते है और अपनी अपनी मुरादे पाते है। तीसरी मजालिस में मौलाना मजाहिर हुसैन (लखनऊ) ने खिताब फरमाया।
उन्होंने कहा कि आज इल्म अर्थात ज्ञान को प्राप्त करने की सख्त जरूरत है। उन्होंने कहा कि इल्म (ज्ञान) हासिल करने के लिए चाहे आपको विदेश ही क्यों न जाना पड़े । हमें पढ़ने की आदत डालनी चाहिए इससे मानसिक विकास होता है। चौथी मजलिस में मौलाना मुफज्जिल अली साहब, पांचवी मजालिस को मौलाना मुहम्मद हुसैनी मुजफ्फरनगरी, छठवी मजलिस में मौलाना कार्रर मोलाई तथा सातवीं मजलिस में मौलाना मेंहदी हसन वाइज जलालपुरी ने खिताब फरमाया। इस मौके पर दरग़ाह महासचिव इमरान अली, आरिफ , रिजवान प्रधान , रियासत अली, जॉन अब्बास आदि मौजूद रहे ।