कारगिल युद्ध ने मुजफ्फरनगर जनपद के पचेंडा कलां निवासी कामेश बाला से उनका जीवनसाथी छीन लिया, लेकिन देश सेवा का जज्बा उनके परिवार में आज भी जीवित है। 1999 में ऑपरेशन विजय के दौरान पति लांस नायक बचन सिंह की शहादत का दर्द आज भी उनकी आंखों में दिखाई देता है।
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इस दर्द के बीच उन्हें इस बात का संतोष और गर्व भी है कि उनका बेटा आज भारतीय सेना में अधिकारी बनकर देश की सीमाओं की रक्षा कर रहा है। उनके लिए पिता की विरासत को आगे बढ़ाने जैसा है।
ऑपरेशन विजय के दौरान लांस नायक बचन सिंह 12 जून 1999 को तोलोलिंग चोटी पर दुश्मनों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। उस समय उनके जुड़वा बेटे महज छह वर्ष के थे। विषम परिस्थितियों में कामेश बाला ने दोनों बेटों का पालन-पोषण किया।
बड़ा बेटा हितेश आज उसी राजपूताना राइफल्स में अधिकारी बनकर देश सेवा कर रहा है, जबकि छोटा बेटा हेमंत चयन के अंतिम चरण तक पहुंचने के बावजूद दस्तावेज संबंधी त्रुटि के कारण सेना में शामिल नहीं हो सका था। अब परिवार के साथ रहकर व्यवसाय संभाल रहा है।
बाला ने बताया कि 12 जून की रात को वह शहीद हो गए थे। 13 जून की सुबह उनको फोन के जरिये सूचना मिली थी। उनकी याद में शासन से अनुमति के बाद दोनों बेटों ने मिलकर शहीद बचन सिंह की प्रतिमा स्थापित कराई।
प्रतिवर्ष 13 जून को हवन पूजन कराया जाता है। मूर्ति स्थल की साफ-सफाई और व्यवस्था के लिए सेवादार रखा हुआ है। वह कहती हैं कि यह प्रतिमा मेरे पति की याद नहीं, मेरी जिंदगी का हिस्सा है।