परिवार के साथ सदर भाजपा प्रत्याशी कपिलदेव अग्रवाल।
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जिले की शहर सीट पर वही विधायक बनेगा, जो एक लाख वोटों का आंकड़ा छुएगा। सपा अगर हिंदू वोटों में 20 हजार से अधिक की सेंधमारी नहीं कर पाई तो बीजेपी की राह आसान हो जाएगी। सपा अगर इतने वोट हासिल करने में कामयाब हो गई तो साइकिल चल जाएगी। बीजेपी के पक्ष में अति पिछड़ों की एकजुटता यहां कमल खिलाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। सपा जहां 90 हजार तक पहुंचने की बात कर रही है, वहीं बीजेपी एक लाख से अधिक वोट मिलने का दावा कर रही है। शहर में तरफ चुनाव की ही चर्चा हो रही हैं।
मुजफ्फरनगर विधानसभा सीट पर कुल तीन लाख 34 हजार 187 मतदाता हैं। इनमें से दो लाख 14 हजार 492 मतदाताओं ने अपने मत का प्रयोग किया है। कुल 64.18 प्रतिशत मतदान हुआ है। शहर के चौराहों और दुकानों पर चुनावी चर्चाओं में बीएसपी और रालोद को समीक्षक 35 हजार के लगभग वोट दे रहे हैं। आगे बचे एक लाख 80 हजार वोटों में बीजेपी और सपा के बीच सीधा मुकाबला है। चर्चा यह है कि जो एक लाख का आंकड़ा छुएगा या उसके नजदीक जाएगा, जीत उसी को हासिल होगी। बीजेपी के नेेताओं की मानें तो वह एक लाख से ऊपर वोट मिलने का दावा कर रहे हैं। दावे सपा के भी कम नहीं हैं।
सपा नेताओं की मानें तो उन्हें 90 हजार वोट मिल रहे हैं। जिस तरह अति पिछड़ी जातियों के बूथों पर मत प्रतिशत अच्छा रहा है और उनमें बीजेपी के प्रति एकजुटता दिखाई दी है, उससे बीजेपी में कुछ सुकून दिखाई देता है। आम लोगों में बीजेपी और सपा से कौन जीतेगा, इसको लेकर चर्चाएं छिड़ी हुई हैं। दूसरी तरफ बसपा के राकेश शर्मा को कितने वोट मिलेंगे। रालोद की पायल माहेश्वरी कितनी वोट ले पाएंगी, इसको लेकर कयासबाजी का दौर जारी है। खालापार के बूथों पर नईमंडी के मुकाबले क्या स्थिति है। 11 मार्च तक वोटरों को प्रत्याशियों को हराने-जिताने का अच्छा मौका मिल गया है।