अधिकारियों की लापरवाही बच्चों को पड़ सकती थी भारी
मुजफ्फरनगर। जिला प्रशासन की संवेदनहीनता और सजग नहीं होने के कारण दस हजार छात्र चूहे वाला मिड-डे मील खा गए। दो कॉलेजों से सूचना मिलने के बाद भी अन्य 26 कॉलेजों में बच्चे भोजन न खाएं ऐसा प्रयास किया ही नहीं किया गया।
जिले के इंटर कॉलेजों में कक्षा छह से आठ तक के गरीब परिवारों के बच्चों को जनवरी माह से मिड-डे मिल दिया जा रहा है। चार ब्लाक सदर, पुरकाजी, चरथावल और मोरना में एक ही संस्था इसका वितरण कर रही थी। मंगलवार को जो दाल-चावल पकाए गए, उसमें किसी कारण चूहे गिर गए। जब भोजन वितरित हुआ तो जनता इंटर कॉलेज पचेंडा और जयहिंद इंटर कॉलेज चरथावल में पके भोजन से चूहे निकले। चरथावल में भोजन वितरण से पहले ही चूहा दिखाई दे गया। इस कारण वितरण नहीं हुआ और उसे फेंक दिया गया। प्रधानाचार्य राजेंद्र प्रजापति ने डीआईओएस को इसकी सूचना भी दे दी। जनता इंटर कॉलेज में भोजन के बीच में चूहा सामने आया, तो जिन छात्रों के आगे भोजन था, उन्हें मना कर दिया गया। यहां भोजन चखने वाले शिक्षक और भोजन खाने वाले छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां की सूचना भी प्रशासनिक अधिकारियों को मिल गई। इसके बावजूद जयहिंद इंटर कॉलेज में चूहा निकलने के मामले को दबाने का प्रयास किया गया। जबकि मामला उछलने के बाद मुस्तफाबाद पचेंडा के प्रधानाचार्य और तीन शिक्षकों पर एनजीओ के साथ ही मुकदमा दर्ज करा दिया। यदि अफसर समय से सभी स्कूलों में मिड डे मील नहीं खाने की सूचना प्रसारित करा देते, तो अन्य कॉलेजों के बच्चों को चूहे वाला मिड डे मील नहीं खाना पड़ता।