सीएए के विरोध में धरना प्रदर्शन करती महिलाएं
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देवबंद(सहारनपुर)। नागरिकता संशोधन कानून, एनपीआर और प्रस्तावित एनआरसी के विरोध में चल रहे धरना प्रदर्शन के 27वें दिन महिलाओं ने कहा कि जिस तरह सुप्रीम कोर्ट का प्रतिनिधिमंडल शाहीन बाग में जाकर वार्ता कर रहा है उसी तरह सरकार अपने प्रतिनिधिमंडल को भेजकर वार्ता करे तो इसका समाधान निकल सकता है, लेकिन सरकार ने हठधर्मिता पर अड़े रहने की कसम खाई हुईं हैं।
मुत्तहिदा ख्वातीन कमेटी के बैनर तले ईदगाह मैदान में चल रहे सत्याग्रह में शनिवार को आंदोलनकारी फरीहा और रुबीना ने संयुक्त रुप से कहा कि केंद्र सरकार के गलत फैसलों और गलत नीतियों से आज पूरा देश प्रभावित है। नोटबंदी से लेकर जीएसटी तक के सरकार के गलत फैसलों ने देश की अर्थव्यवस्था को बरबाद करके रख दिया है। उन्होंने कहा कि देश की जनता सरकार ने इन मुद्दों पर सवाल न पूछे इसलिए सरकार संविधान विरोधी बिल लाई है ताकि धर्म के नाम पर लोगों को बांटा जा सके और सरकार अपनी मनमानी करती रहे। शीबा नाज ने कहा कि संविधान को बचाने के लिए सर्वसमाज के लोग एकजुट हैं, देश में तानाशाही नहीं चलने दी जाएगी। आयशा और तसलीमा ने कहा कि सरकार इस बात को अच्छे से समझ ले कि संविधान की शपथ लेकर सरकार कहलाने वाले लोगों को किसी कीमत पर संविधान की धज्जियां नहीं उड़ाने दी जाएगी। इनके अलावा अन्य महिला वक्ताओं ने एनपीआर को एनआरसी का प्रथम कदम बताते हुए इसका बायकाट करने और कागज न दिखाने का आह्वान किया।