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......अफसरों की एक भूल, जिले के लिए बन गई शूल

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अफसरों की भूल कई लोगों की जिंदगी पर पड़ सकती है भारी
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मुजफ्फरनगर। जिले के अफसरों की एक भूल ने कई लोगों को कोरोना के संक्रमण तक पहुंचा दिया। अब यह स्थिति इतनी खतरनाक हो गई है कि भरपाई कर पाना संभव नहीं होगा। दिल्ली के शाहीन बाग से लौटे खतौली निवासी व्यक्ति की जांच नहीं कराने से हालात बिगड़ते जा रह हैं। जनाजे में लोगों को शामिल होने देने से संक्रमण समाज तक पहुंच गया। मृतक के परिवार के ही पांच लोग संक्रमित मिल चुके हैं। इसके अलावा अभी अन्य कई लोगों के पॉजिटिव होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
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12 अप्रैल को दिल्ली से लौटे खतौली के इस्लामनगर निवासी व्यक्ति का शाहीन बाग में आना-जाना रहा था। इसकी जानकारी होने के बावजूद प्रशासन ने उसकी जांच नहीं कराई। दो दिन होम क्वारंटीन रहकर 14 अप्रैल को उसकी मौत हो गई। क्वारंटीन करने के बावजूद प्रशासन को उसकी मौत की भनक तक नहीं हुई। परिजन और रिश्तेदारों के अतिरिक्त आसपास के गांव तक के लोग उसके जनाजे में शामिल हुए। नजदीक के घर में उसके शव को नहलाया गया। इसके बाद कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। मामला चर्चाओं में आया तो प्रशासन ने अपनी भूल सुधारने की कोशिश की। उसके परिजनों के सैंपल लिए, तो मृतक की मां, एक पुत्र, पुत्री संक्रमित पाए गए। इस पर अफसरों के हाथ-पांव फूल गए। इसके बाद जिला प्रशासन के साथ ही स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी भी हरकत में आ गए। मृतक के जनाजे में शामिल हुए लोगों की तलाश शुरू हुई और लोगों के सैंपल लिए गए। शनिवार को मृतक की बहन और रविवार को भाई की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने से तय हो गया है कि दिल्ली से लौटे व्यक्ति की मौत कोरोना के संक्रमण से हुई। इस परिवार के पांच लोग संक्रमित पाए गए हैं। स्थिति यह है कि मृतक की पत्नी के इद्दत में होने के कारण उसका भी सैंपल नहीं लिया जा सका। मोहल्ला इस्लामनगर में फूटे इस कोरोना बम से मच रही तबाही को रोक पाना अब आसान नहीं होगा। हालांकि प्रशासन ने इस्लामनगर को पहले से ही हॉटस्पॉट घोषित कर रखा है और यह पूरी तरह सील ह.ै लेकिन आए दिन निकल रहे पॉजिटिव मामलों से लोगों में दहशत है।
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