दि गंगा किसान चीनी मिल मोरना में सरकारी तंत्र व्यवस्था बिगड़ने से किसानों का करीब दो लाख क्विंटल गन्ना पेराई के इंतजार में खेतों में खड़ा है। चीनी मिलों में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों के अनुरूप व्यवस्था में देरी का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। हालांकि मिल प्रबंधन ने 29 अक्तूबर से मोरना चीनी मिल का पेराई सत्र शुरू करने की संभावना जताई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने चीनी मिल में पेराई प्रक्रिया के दौरान डिस्चार्ज जल की व्यवस्था के निर्देश दिए हैं। गंगा क्षेत्र से जुड़े चीनी मिलों के लिए बोर्ड ने यह व्यवस्था बनाने को मिल प्रबंधन को निर्देश किए हैं। मिल प्रबंधक प्रबुद्ध चौबे ने बताया कि जल उत्प्रवाह को मानकों के अनुरूप डिस्चार्ज करने की व्यवस्था के उपरांत ही चीनी उत्पादन की अनुमति प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रदान करेगा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सोमवार (आज) दिल्ली में बैठक में अनुमति मिलने की संभावना है।
मिल प्रबंधन ने इटीपी अपग्रेडशन मानकों के अनुरूप कार्य को पूर्ण कर लिया है। डिप्टी चीफ केमिस्ट राजेश त्रिपाठी ने बताया कि मिल के गंदे पानी की व्यवस्था को कार्य योजना बना दी गई है। 15 दिन के एकत्र पानी को साफ कर वापस मिल में प्रयोग किया जाएगा।
शेष पानी को मिल से जुड़े गांव ककराला, अथाई और वजीराबाद आदि को फसल सिंचाई के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। प्रबंध निदेशक सुरेश कुमार ने मिल के विस्तारीकरण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने आसपास के गांव को छाई से निजात दिलाने का आश्वासन दिया। किसान देवेंद्र सिंह ने किसानों को अच्छी नर्सरी के गन्ना बीज दिलाने की मांग की।
ढाई हजार बोरी चीनी उत्पादन का लक्ष्य
मोरना। पेराई सत्र में ढाई हजार चीनी बोरी के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। गन्ना रस के लिए एक करोड़ रुपये की कीमत का बॉयलर तैयार किया गया है। वहीं, करीब 56 लाख की कीमत की सेंट्री फ्युगल की बड़ी मशीन प्लांट में लगाई गई है।