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Muzaffarnagar News: गठबंधन के गणित में खतौली और थानाभवन छोड़ने का फार्मूला

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मुजफ्फरनगर। विधानसभा चुनाव में भाजपा और रालोद के बीच सीट बंटवारे के फार्मूले पर सबकी निगाह टिकी हैं। दिल्ली में हुई रालोद के हस्तिनापुर क्षेत्र के नौ जिलों के पदाधिकारियों की बैठक के बाद नई बहस छिड़ गई है। बागपत की तीनों सीटों के लिए खतौली के अलावा शामली की थानाभवन सीट भाजपा के लिए छोड़ी जा सकती है।
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नई दिल्ली में तुगलक रोड पर केंद्रीय मंत्री एवं रालोद अध्यक्ष जयंत सिंह की अध्यक्षता में पार्टी ने 2027 का रोडमैप तैयार किया। प्रत्येक जिले के पदाधिकारियों की अलग बैठक ली गई। टीम आरएलडी को मजबूत करने और प्रत्येक जिले में 21 से 25 सदस्यीय कमेटी को शीर्ष नेतृत्व के साथ जोड़ने के निर्देश दिए गए।
संगठन की बैठक के बाद नई सियासी चर्चा है। छपरौली, बागपत और बड़ौत सीट पर रालोद अपना दावा मजबूती से रखने की तैयारी में है। बड़ौत में भाजपा के राज्यमंत्री केपी मलिक और बागपत में योगेश धामा वर्तमान विधायक है। चर्चा है कि रालोद अपने गढ़ में मजबूत वापसी के लिए मुजफ्फरनगर और शामली की अपनी कब्जे वाली दो सीट भाजपा को दे सकता है।
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थानाभवन सीट पर रालोद के अशरफ अली और खतौली में मदन भैया विधायक हैं। इन दोनों सीटों को रालोद इस बार भाजपा को देकर बागपत की दो सीटें ले सकता है। सीट बंटवारे के इस फार्मूले से दावेदारों की बेचैनी बढ़नी शुरू हो गई है। वर्तमान विधायकों के अलावा भाजपा-रालोद के टिकट के दावेदार अपनी-अपनी जगह बनाने की जुगत में है।

खतौली में भाजपा-रालोद की कड़ी टक्कर
मुजफ्फरनगर। साल 2012 के परिसीमन के बाद खतौली विधानसभा सीट का गणित भी बदल गया। भाजपा और रालोद के उम्मीदवार यहां से दो-दो बार विधायक चुने गए हैं। वर्ष 2012 में रालोद के करतार भड़ाना जीते लेकिन मुजफ्फरनगर दंगे के बाद भाजपा के टिकट पर 2017 और 2022 में विक्रम सैनी विधायक बने। सैनी की सदस्यता जाने के बाद हुए उपचुनाव में रालोद-सपा गठबंधन में मदन भैया जीत गए। गठबंधन में दावेदारी का मुकाबला बराबरी का है लेकिन माना जा रहा है कि रालोद खतौली को छोड़कर बड़ौत सीट को प्राथमिकता देने की तैयारी में है। ब्यूरो

रालोद के लिए इन सीटों को माना जा रहा रिजर्व
रालोद के लिए छपरौली, बुढ़ाना, पुरकाजी सुरक्षित, मीरापुर, शामली और सिवालखास सीट को सुरक्षित माना जा रहा है। इसके अलावा अन्य सीटों पर दोनों दलों के बीच पुराने नतीजे, वर्तमान समीकरण और संभावनाओं के बाद फैसला होगा।

मीरापुर और थानाभवन का भी समीकरण
गठबंधन में अगर थानाभवन सीट पर रालोद अडिग रहा तो मीरापुर विधानसभा सीट छोड़नी पड़ सकती है। वर्तमान में रालोद की मिथलेश पाल यहां से विधायक है। चुनाव से पहले मिथलेश भाजपा में ही थीं। गठबंधन में उन्हें टिकट मिला और वह जीत गई। रालोद अपने कोटे से मुस्लिम प्रत्याशी को लड़ाने के लिए थानाभवन सीट पर दावेदारी मजबूत रख सकता है लेकिन इसके बदले मीरापुर सीट छोड़नी पड़ सकती है।

शीर्ष पदाधिकारी करेंगे अंतिम फैसला : मलिक
रालोद के क्षेत्रीय अध्यक्ष तरसपाल मलिक का कहना है कि संगठन की मजबूती और आईटी प्रकोष्ठ की मजबूती पर चर्चा की गई है। गठबंधन में अधिक से अधिक सीटों पर दावा किया जाएगा। अंतिम फैसला दोनों दलों के शीर्ष पदाधिकारी लेंगे।
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