पुलिस के मुताबिक, तीन दिन पूर्व दोनों ही घर से गायब रहे थे। हालांकि, शाम के समय मानसी अपने घर लौट आई थी। यह बात उसी दिन शाम के समय काम पर से लौटे धर्मेंद्र की पत्नी ज्वाला देवी ने अपने पति को बता दी थी। धर्मेंद्र बेटी से बेहद नाराज था।
वहीं, गुस्से में शुक्रवार की सुबह धर्मेंद्र ने बेटी मानसी की हत्या कर दी। दो दिन पहले प्रेमी ने अपने परिजनों को शादी के लिए बात करने को धर्मेंद्र के घर भेजा था। प्रेमी के परिजनों ने धर्मेंद्र के सामने शादी का प्रस्ताव रखा, लेकिन धर्मेंद्र ने कड़े शब्दों में इंकार कर दिया था।
आधे घंटे तक बेटी के शव के पास रहा मौजूद
बेटी मानसी की हत्या करने के बाद आरोपी पिता धर्मेंद्र कमरे में ही मौजूद रहा। यहां तक कि उसने अंदर से बंद दरवाजे की कुंडी तक भी नहीं खोली थी। बेटे और भतीजों ने बंद दरवाजे को तोड़ा। तब वह फर्श पर पड़े बेटी के लहूलुहान शव के पास खड़ा मिला। उसके कपड़े खून से सने थे। वह घर से नहीं भागा। आधे घंटे बाद पहुंची पुलिस ने उसे कमरे के अंदर से ही गिरफ्तार कर लिया।
यह रहा घटना क्रम
बृहस्पतिवार की रात में धर्मेंद्र अपने पुत्र सावन के साथ अलग कमरे सो गया। दूसरे कमरे में मानसी सो गई, जबकि मानसी की मां ज्वाला देवी मकान की दूसरी मंजिल पर कमरे में सो रही थी। बराबर के कमरे में धर्मेंद्र के बड़े भाई अंगूरा के बेटे दीपक व गुलशन सो रहे थे।
पुलिस के अनुसार, शुक्रवार की सुबह करीब सवा छह बजे धर्मेंद्र अपने कमरे से उठकर धारदार दांव लेकर अपनी बेटी मानसी के कमरे में पहुंचा और अंदर से कमरे की कुंडी लगा ली। इसके बाद धर्मेंद्र ने धारदार दांव से इकलौती बेटी मानसी की गर्दन रेत कर हत्या कर दी। इस दौरान मानसी की चीख सुनकर परिवार के लोग जाग गए।
पुलिस ने बताया कि मानसी की चीख सुनकर उसका भाई सावन, ताऊ के दोनों बेटे दीपक व गुलशन कमरे की तरफ दौड़े। मानसी का कमरा अंदर से बंद था। दरवाजा तोड़ा गया तो वहां धर्मेंद्र मौजूद मिला।