मुजफ्फरनगर शहर में नदी रोड से जुड़ी बस्तियों में हर तरफ उदासी छायी रही। मोहल्ला गऊशाला की छोटी सी गली में हर कोई उस घर तक दो पल जाना चाह रहा था, जहां सड़क दुर्घटना में जान गवां चुके दो बेटों की अर्थियां सज चुकी थी। मां की चीत्कार से हर आंख में आंसू थे। अंतिम यात्रा में कंधा देने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। मेलों में दुकान सजाने वाले अभागे पिता अनिल और मां पूनम की दुनिया अब उजड़ चुकी है।
हरिद्वार के भीमगोड़ा में लगे मेले में दुकान सजाने के लिए रोजमर्रा की तरह अनिल घर से निकल चुका था। वाक्या शनिवार की दोपहर का, तभी उसके फोन पर कॉल आई। बदहवास अनिल मंगलौर से ही वापस लौट लिया। बेटों की बाइक को ट्रक ने टक्कर मार दी है, यह सोचकर उसकी रूह कांप रही थी। एक-एक पल घंटे की तरह लगे, मन में बेचैनी।
बदहवास पिता जैसे ही जिला चिकित्सालय की इमरजेंसी पहुंचा, तो छोटे बेटे लविश (18) की लाश देखकर चीख उठा। डॉक्टरों ने बड़े बेटे सन्नी (19) की हालत में सुधार नहीं देखा तो मेरठ रेफर कर दिया। मेरठ मेडिकल के गेट पर ही सन्नी ने भी दम तोड़ दिया। दोनों युवा बेटों की मौत ने माता-पिता की उम्मीदों के चिराग बुझा दिए।
हालत बिगड़ने पर मां को भर्ती कराना पड़ा। छोटी सी आमदनी के लिए मेलों में यहां से वहां घूमते अनिल ने तीस जून को ही लविश की मांग पर कर्ज लेकर बाइक खरीदी थी। शनिवार को सुजडू चुंगी पर ट्रक ने बाइक से जा रहे दोनों भाइयों को कुचल दिया था। पोस्टमार्टम के बाद रविवार को गऊशाला में उनके शव पहुंचे, तो मातम छा गया।
मां पूनम बेहोश हो गई। बड़े बुजुर्ग अनहोनी पर बिलखते दिखे। अंतिम यात्रा में हर दिल रोया। काली नदी शमशान घाट पर दोनों भाइयों की चिता जली, तो पिता को संभालने के लिए सैकड़ों हाथों ने सहारा दिया। राज्यमंत्री मुकेश चौधरी और सपा नेता गौरव स्वरूप ने भी सांत्वना दी।