संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। 12 साल पुराने मुकदमे में अदालत ने पुलिस मुठभेड़ में हथियार एवं चरस बरामदगी में पकड़े गए चारों आरोपियों की मौजूदगी को संदिग्ध मानते हुए बरी कर दिया। अपर सत्र न्यायालय कोर्ट नंबर-7 की पीठासीन अधिकारी दिव्या भार्गव ने प्रकरण में सुनवाई के बाद फैसला दिया।
थाना नई मंडी थाना प्रभारी अरुण कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम 16 अगस्त 2013 को अलमासपुर चौराहे गश्त कर रहा थी। अभियोजन पक्ष के मुताबिक सूचना के बाद एटूजेड कॉलोनी के चौराहे के पास पुलिस टीम और आरोपियों की मुठभेड़ हुई। पुलिस ने घेराबंदी के बाद चार आरोपी गिरफ्तार किए थे। इनमें थाना काेतवाली नगर के लद्दावाला निवासी शमीम, थाना जानसठ के मोहल्ला जानताबाद निवासी अब्दुल कादिर, थाना नई मंडी के मोहल्ला साहवली नाला निवासी सरवन, थाना नई मंडी के पश्चिमी भोपा रोड निवासी विनोद गोयल को अवैध हथियारों और चरस की बरामदगी दर्शाकर चालान किया था। विवेचना के बाद पुलिस ने चारों के खिलाफ आरोप पत्र प्रेषित किया।
चारों आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग पत्रावलियों पर आरोप तय हुए। आईपीसी की धारा 307 के अलावा एनडीपीएस एक्ट एवं आयुध अधिनियम की धाराओं में सत्र परीक्षण हुआ। बचाव पक्ष के अधिवक्ता सीताराम वर्मा ने बताया कि अदालत ने चारों की गिरफ्तारी, बरामदगी काे संदेहास्पद मानते हुए दोषमुक्त करने का निर्णय सुनाया।
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