शहीद को अंतिम विदाई देने उमड़ा शहर
मुजफ्फरनगर। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में शहीद हुए गांव पचेंडा निवासी सीआरपीएफ कोबरा विंग के डिप्टी कमांडेंट विकास सिंघल को अंतिम विदाई देने के लिए पूरा शहर उमड़ पड़ा। वहलना चौक से पचेंडा तक शहीद के काफिले पर पुष्पवर्षा की गई। पचेंडा के जनता इंटर कॉलेज में शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जिसके बाद शव उनके घर ले जाया गया। घर पर मंगलवार को विकास का शव पहुंचते ही परिजन फूट फूट कर रो पड़े। गांव के श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके दो वर्षीय बेटे केशव ने शव को मुखाग्नि दी।
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में शहीद हुए सीआरपीएफ की कोबरा विंग के डिप्टी कमांडेंट विकास सिंघल का पार्थिव शरीर मंगलवार सुबह दिल्ली से मुजफ्फरनगर लाया गया। भंगेला चेकपोस्ट पर सीओ खतौली आशीष कुमार व एसडीएम इंद्राकांत द्विवेदी ने शहीद को सलामी दी। इसके बाद शव करीब 10.30 बजे वहलना चौक पहुंचा, जहां बड़ी संख्या में युवाओं ने जांबाज विकास सिंघल के सम्मान में नारे लगाए। यहां से काफिला पीडब्लूडी गेस्ट हाउस पहुंचा, जहां गन्ना विकास मंत्री सुरेश राणा के साथ ही चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने शहीद को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद शहर के मीनाक्षी चौक, शिवचौक, झांसी रानी और गांधी कॉलोनी होते हुए शहीद का काफिला गांव पचेंडा पहुंचा। पूरे मार्ग में जगह-जगह शहीद के काफिले पर पुष्पवर्षा की गई।
गांव पचेंडा पहुंचने पर शहीद के शव को जनता इंटर कॉलेज मैदान में ले जाया गया, जहां सबसे पहले रोते-बिलखते परिजनों ने शव को पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद मंत्री सुरेश राणा, राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल, विधायक उमेश मलिक, प्रमोद उटवाल व विक्रम सैनी के साथ ही डीएम सेल्वा कुमारी जे व एसएसपी अभिषेक यादव, एसडीएम दीपक कुमार ने शहीद को पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद, सीआरपीएफ सेंट्रल सेक्टर लखनऊ के आईजी सुभाषचंद्र, कोबरा विंग के आईजी केके शर्मा व कमांडेंट सुधीर कुमार और 108 बटालियन रैपिड एक्शन फोर्स मेरठ के कमांडेंट राजेंद्र प्रसाद ने शहीद के शव पर पुष्प चक्र अर्पित किए। सीआरपीएफ की टीम ने मातमी धुन बजाने के साथ ही उन्हें अंतिम सलामी दी। इसके बाद शहीद का शव उनके घर ले जाया गया। परिजनों ने शव के अंतिम दर्शन किए। यहां मंत्री सुरेश राणा, कपिलदेव अग्रवाल व विधायक उमेश मलिक ने शहीद के परिजनों को शासन द्वारा घोषित 50 लाख सहायता राशि का चेक सौंपा। इसके बाद शहीद के शव को कांधों पर रखकर गांव के श्मशान घाट ले जाया गया, जहां अश्रुपूरित नेत्रों के साथ राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार किया गया। शहीद के दो साल के बेटे केशव ने शव को मुखाग्नि दी।