देवबंद। इंडस्ट्रियल इस्टेट में स्थित अधिग्रहीत की गई करोड़ों रुपये कीमत की भूमि को जिला उद्योग केंद्र द्वारा देवबंद के एक व्यापारी के परिवार को सस्ते भाव पर आवंटित किए जाने का मामला तूल पकड़ रहा है। मंगलवार को गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सेठ कुलदीप छाबड़ा ने इस मामले में जिला प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने पर विभिन्न संगठनों को साथ लेकर धरना प्रदर्शनी की चेतावनी दी।
सेठ कुलदीप छाबड़ा ने मंगलवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि उनके पिता मेलाराम की नूरपुर अंदर हदूद में खसरा नंबर 570 व 573 (2 बीघा 5 बिस्से) यानि 4500 वर्ग मीटर जमीन है। जिसे रूरल इंडस्ट्रीज प्रोजेक्ट (आरआईपी) के अंतर्गत 1952 में अधिग्रहीत किया गया था। जिला उद्योग केंद्र ने 1975 में अपना आवास व कार्यालय स्थायी रूप से सहारनपुर में स्थानांतरित कर दिया। जिस कारण भूमि पर बने आवास व कार्यालय पिछले करीब 46 साल से खंडहर बने पड़े हैं। उनका आरोप है कि अब प्रशासन की मिलीभत से उक्त भूमि का 1/2 भाग (करीब 1900 वर्ग मीटर) नगर के एक व्यापारी को भूमि महज 47 लाख रुपये में चार अलग-अलग लोगों के नाम आवंटित कर 2520 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से लीज डीड भी पंजीकृत करा दी गई। छाबड़ा का आरोप है कि चार लोगों के नाम जमीन आवंटित किए गए, लेकिन उसकी गेट लगाकर चहारदीवारी की गई, जबकि चारों लोगों को अलग-अलग चहारदीवारी करनी चाहिए थी। उन्होंने प्रशासन से नियम विरुद्ध हुए आवंटन को निरस्त कर उद्योग लगाने के लिए प्राथमिकता के आधार पर भूमि के आवंटन के आदेश उनके हक में पारित कराने की मांग की है।
आरोप निराधार, बाकायदा विज्ञापन प्रकाशित कराकर आवंटित की गई जमीन
कुलदीप छाबड़ा के आरोप निराधार हैं। 1952 में रेवेन्यू बोर्ड ने उक्त जमीन को अधिग्रहीत किया था। उसका मुआवजा मिला या नहीं यह उनके क्षेत्र से बाहर का मामला है। अब जिन लोगों को जमीन आवंटित की गई है उसे बाकायदा डीएम की संस्तुति पर मानक पूरे करने के बाद दी गई है। यदि उक्त जमीन के चार भाग नहीं किए गए हैं तो उसकी जांच कराई जाएगी। जमीन को आवंटित करने से पूर्व समाचार पत्रों में इसके विज्ञापन भी प्रकाशित कराए गए थे। देवबंद से केवल चार ही आवेदन आए थे जिन्हें आवंटित किया गया। - सिद्धार्थ यादव, उपायुक्त जिला उद्योग केंद्र सहारनपुर