-ककरोली गांव में इमाम हुसैन की याद में आयोजित मजलिस में बोले मौलाना अरूज जौनपुरी
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संवाद न्यूज एजेंसी
मोरना। मौलाना अरूज जौनपुरी ने कहा कि आतंकवादी ही अपने आप को धार्मिक बताता है, जबकि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। किसी व्यक्ति के बोलने और व्यवहार से अगर पड़ोसी परेशान है तो वह किसी का सगा नहीं हो सकता।
दिवान खाना गढ़ी मोहल्ला ककरोली गांव में इमाम हुसैन की याद में आयोजित मजलिस में जौनपुरी ने कहा कि इमाम हुसैन पूरी दुनिया में भाईचारा काम करना चाहते थे। दुश्मन ही नहीं उसकी सेना को भी पानी पिलाकर उनकी प्यास बुझाई, यह मानवता की सबसे बड़ी मिसाल है।
लड़ाई झगड़ा नहीं, मदीना से आतंकवाद समाप्त करने के लिए इमाम हुसैन निकले थे। कुछ ताकतें देश में आतंक फैला कर कब्जा करना चाहती हैं। इस्लाम में हर महिला पुरुष को शिक्षा ग्रहण करना जरूरी बताया गया है।
इमाम हुसैन शिक्षित थे, उनकी फौज में भी पढ़े-लिखे लोग शामिल रहे। उन्होंने अनपढ़ को कभी साथ नहीं रखा। शिक्षाविद व्यक्ति को साथ लेकर चलें। मजलिस में सोजखानी हसन अली सम्भलहेड़ा व नोहाखानी कासिफ, नवाज मेहंदी ने की। इसके बाद घोड़े, ऊंट पर अलम निकल गए। जो बाजार, दरगाह होते हुए देर शाम कर्बला में दफन किए गए। मजलिस के आयोजन में नियाज मेहंदी व डॉ़ जिया आलम ने मुख्य भूमिका निभाई। दूर-दराज से लोग पहुंचे।
बेटियों को अधिक से अधिक शिक्षित करें : इकरा हसन
ककरौली। ककरौली स्थित इमामबाड़े में इमाम हुसैन की याद में मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस में पहुंची कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने कहा कि आज अयाम ए अजां का आखिरी दिन है। इसी दिन हजरत इमाम हुसैन का काफिला मदीना पहुंचा था। उनकी कुर्बानी का वो दुःख हमारे दिलों में आज भी जिंदा है।
हम उनकी शहादत को हमेशा याद रखेंगे। उनके द्वारा बताए गए राह पर चलेंगे। हजरत इमाम हुसैन ने हक और इन्साफ के लिए अपनी शहादत दी। आप लोग डेढ़ सौ साल से मजलिस आयुक्त करके उनकी याद को जिंदा रखे हुए हैं, यह बहुत बड़ी बात है। हमारे बुजुर्गों ने शहादत देकर इस देश की सेवा की है। बेटियों को इतना पढ़ाओ कि महिलाओं व बच्चों पर कोई ज़ुल्म न हो। सभी बेटियां आत्मनिर्भर बन सकें।
हम तालीम की रोशनी से ही ज़हालत से आजाद हो पाएंगे। खास तौर पर लड़कियों को शिक्षा दिलाना बहुत जरूरी है। शिक्षा वो ताकत है, जिसके आगे सारी ताकतें नतमस्तक हैं। शिक्षा हमारी नस्लों को सुधार देगी। आपको यह तय करना है कि आपको कहां खड़ा होना है।