कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेले के लिए जिला पंचायत प्रशासन ने गंगा तट क्षेत्र में तैयारियां शुरू कर दी हैं। तीर्थ यात्रियों को व्यवस्थित ढंग से डेरा बसाने के लिए भूमि को समतल किया गया। बुधवार से श्रद्धालुओं का कारवां शुक्रताल की ओर बढ़ने लगेगा।
पौराणिक तीर्थ में पांच दिवसीय मेला दस नवंबर से लगेगा। जिला पंचायत ने गंगा तट क्षेत्र में श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए भूमि को समतल कर बेरिकेडिंग की है। एएमए डॉ. नूतन शर्मा ने पंचायत जेई और अन्य कर्मचारियों को दिशा निर्देश दिए।
स्वामी कल्याणदेव तिराहे से गंगा घाट, नक्षत्र वाटिका से सच्चा प्रकाश आश्रम और विश्वकर्मा मंदिर से हनुमत धाम तक सड़क मार्गों पर अभी तक सफाई शुरू नहीं की गई है। गंगाघाट से सड़क मार्ग पर सोमवार को खंभों पर ट्यूब लाइट लगाने का कार्य हुआ। बुधवार से जिले के गांवों से श्रद्धालु तीर्थ में पहुंचने लगेंगे। श्रीगंगा सेवा समिति और संत महात्माओं ने मेला क्षेत्र में मच्छरों से बचाव के लिए फॉगिंग कराने, कूड़े का निस्तारण और जल निकासी कराने की मांग की है।
वन्य पार्क उपेक्षित, बंद पड़े हैं दरवाजे
हस्तिानपुर जीव अभ्यारण्य से जुड़े शुक्रताल में वन विभाग का पार्क उपेक्षित और बदहाल है। कई साल से बंद पड़े वन्य पार्क का रखरखाव नहीं होने से तीर्थ में आने वाले यात्रियों को कोई लाभ नहीं मिलता।
मोरना-शुक्रताल मार्ग पर वन विभाग का पार्क रखरखाव और सौंदर्यीकरण के अभाव में बंद पड़ा है। परिसर में घास उग चुकी हैं, झूले टूटे हुए हैं। मुख्य द्वार तक क्षतिग्रस्त पड़ा है। तीर्थ यात्रियों के विश्राम, बच्चों के झूलने और प्रकृति सौंदर्य से जोड़ने के लिए दस साल पहले वन्य विभाग ने पार्क का निर्माण कराया था, लेकिन बजट की कमी और कर्मचारियों के संकट में जन उपयोगी नहीं बन पाया।
उधर, क्षेत्रीय वन रेंजर राजसिंह पुंडीर कहते हैं कि शासन को पार्क के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए पत्रावली भेजी गई है। नगर पंचायत भौकरहेड़ी के अध्यक्ष कैप्टन ज्ञानेंद्र, जिला कुश्ती संघ सचिव अमित राठी, शुक्रताल प्रधान सुशील शर्मा, चंद्रवीर राठी ने उपनिदेशक सामाजिक वानिकी से पार्क को विकसित कराने की मांग की है।